
Rama Devi Sahu
16 days ago
🔱 क्या आप जानते हैं कि एक बार स्वयं माँ गंगा की जलधारा बीच में ही सूख गई थी? जब महादेव ने तोड़ा माँ गंगा का अभिमान! 🔱🌊 बहुत समय पहले की बात है। माँ गंगा हिमालय से निकलकर पूरे वेग के साथ पृथ्वी पर प्रवाहित हो रही थीं। उनके पवित्र जल से प्रकृति हरी-भरी रहती और करोड़ों लोग उन्हें मोक्षदायिनी मानकर पूजते थे। जहाँ गंगा बहतीं, वहाँ जीवन खिल उठता था। धीरे-धीरे अपनी इसी महिमा और अपार शक्ति को देखकर माँ गंगा के मन में सूक्ष्म अहंकार जन्म लेने लगा। उन्हें लगा कि संसार में उनके प्रवाह को रोकना किसी के बस की बात नहीं है। महादेव की परीक्षा और गंगा का वेग 🌿 एक दिन भगवान शिव को गंगा के दूसरे तट पर जाना था। उन्होंने स्नेहपूर्वक माँ गंगा से कहा— "हे देवी! कुछ क्षण के लिए अपने प्रवाह को शांत कर दो ताकि मैं सहजता से पार जा सकूँ।" किंतु अहंकार में डूबी माँ गंगा ने प्रार्थना अनसुनी कर दी और और अधिक वेग व गर्जना के साथ बहने लगीं। शिव का प्रहार और रुका प्रवाह ⚡ महादेव कुछ क्षण शांत रहे, फिर उन्होंने धीरे से अपना चरण भूमि पर रखा और एक प्रचंड प्रहार किया। पूरी धरती काँप उठी! अगले ही क्षण चमत्कार हुआ—माँ गंगा की विशाल जलधारा सूखने लगी और वहाँ केवल सूखी भूमि रह गई। यह देखकर माँ गंगा घबरा उठीं। वे अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट हुईं और हाथ जोड़कर बोलीं— "प्रभु! मुझसे बड़ी भूल हो गई। यदि मेरा जल रुक गया तो संसार प्यास से तड़प जाएगा। कृपया मुझे क्षमा करें!" महादेव का दिव्य संदेश 🪷 भगवान शिव मुस्कुराए और बोले: "हे गंगे! शक्ति का होना महान है, लेकिन उससे भी महान है विनम्रता। तुम्हारा उद्देश्य बल का प्रदर्शन नहीं, बल्कि संसार का पालन करना है।" माँ गंगा ने क्षमा माँगी। शिव जी ने त्रिशूल से पृथ्वी को स्पर्श किया और निर्मल जल फिर से बहने लगा। सूखी धरती पर फिर हरियाली लौट आई! 🌳 इस कथा से हमें क्या सीख मिलती है? 👇 संसार में सबसे बड़ी शक्ति भी विनम्रता के बिना अधूरी है। सामर्थ्य (Power) तभी पवित्र बनता है जब उसके साथ सेवा और करुणा जुड़ी हो। ईश्वर के सामने अहंकार का कोई स्थान नहीं होता। आज भी माँ गंगा उसी करुणा और विनम्रता के साथ हमारा कल्याण कर रही हैं। 🙏 🙏🔱॥ हर हर महादेव ॥🔱🙏 ॥ जय माँ गंगे ॥

Comments (12)

Rama Devi Sahu
Aug 14, 2026
ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏 🗓️ हरियाली तीज: 15 अगस्त 2026, शनिवार 🗓️ तृतीया तिथि: 14 अगस्त शाम लगभग 06:48 बजे से 15 अगस्त शाम लगभग 05:30 बजे तक हरियाली तीज श्रावण मास की हरियाली, माता पार्वती की भक्ति और शिव-पार्वती के मंगल भाव का सुंदर पर्व है। यह दिन प्रेम, धैर्य, विश्वास और सात्त्विक गृहस्थ जीवन के संकल्प से जुड़ा माना जाता है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। पूजा में दीप, पुष्प, अक्षत, फल, नैवेद्य और श्रद्धानुसार श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” मंत्र का जाप करें और हरियाली तीज व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। सावन की हरियाली हमें प्रकृति, संबंधों और जीवन के प्रति कृतज्ञ होना सिखाती है। हरियाली तीज के दिन हरि चूड़िया, हरे वस्त्र, सोलह श्रृंगार और मेहंदी लगाने का विशेष महत्व होता है। हरियाली तीज के दिन काली मिट्टी से भगवान शिव, मां पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति बनाकर पूजा की जाती है और तीज की कथा सुनी जाती है।

Rama Devi Sahu
Aug 14, 2026
ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏 🗓️ हरियाली तीज: 15 अगस्त 2026, शनिवार 🗓️ तृतीया तिथि: 14 अगस्त शाम लगभग 06:48 बजे से 15 अगस्त शाम लगभग 05:30 बजे तक हरियाली तीज श्रावण मास की हरियाली, माता पार्वती की भक्ति और शिव-पार्वती के मंगल भाव का सुंदर पर्व है। यह दिन प्रेम, धैर्य, विश्वास और सात्त्विक गृहस्थ जीवन के संकल्प से जुड़ा माना जाता है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। पूजा में दीप, पुष्प, अक्षत, फल, नैवेद्य और श्रद्धानुसार श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” मंत्र का जाप करें और हरियाली तीज व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। सावन की हरियाली हमें प्रकृति, संबंधों और जीवन के प्रति कृतज्ञ होना सिखाती है। हरियाली तीज के दिन हरि चूड़िया, हरे वस्त्र, सोलह श्रृंगार और मेहंदी लगाने का विशेष महत्व होता है। हरियाली तीज के दिन काली मिट्टी से भगवान शिव, मां पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति बनाकर पूजा की जाती है और तीज की कथा सुनी जाती है।

Rama Devi Sahu
Aug 14, 2026
ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏 🗓️ हरियाली तीज: 15 अगस्त 2026, शनिवार 🗓️ तृतीया तिथि: 14 अगस्त शाम लगभग 06:48 बजे से 15 अगस्त शाम लगभग 05:30 बजे तक हरियाली तीज श्रावण मास की हरियाली, माता पार्वती की भक्ति और शिव-पार्वती के मंगल भाव का सुंदर पर्व है। यह दिन प्रेम, धैर्य, विश्वास और सात्त्विक गृहस्थ जीवन के संकल्प से जुड़ा माना जाता है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। पूजा में दीप, पुष्प, अक्षत, फल, नैवेद्य और श्रद्धानुसार श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” मंत्र का जाप करें और हरियाली तीज व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। सावन की हरियाली हमें प्रकृति, संबंधों और जीवन के प्रति कृतज्ञ होना सिखाती है। हरियाली तीज के दिन हरि चूड़िया, हरे वस्त्र, सोलह श्रृंगार और मेहंदी लगाने का विशेष महत्व होता है। हरियाली तीज के दिन काली मिट्टी से भगवान शिव, मां पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति बनाकर पूजा की जाती है और तीज की कथा सुनी जाती है।

Rama Devi Sahu
Aug 14, 2026
अगर हमारा जीवन आनंदमय है, तो यह हमारे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है, अन्यथा सारी उपलब्धियां सिर्फ औरों को दिखाने के लिए ही हैं। 🙏राधे राधे🙏 शुभ रात्रि वंदन 🌹🌹

Saumya Sharma
Aug 14, 2026
बहुत सुन्दर comment 👌👌👌 सही बात है,कर्म फल से कोई नहीं बच सकता, राधे राधे दीदी 🙏🌹☺️ ठाकुर जी की कृपा आप सपरिवार पर सदैव ही बनी रहे 🙏 इसी शुभकामना के साथ शुभ रात्रि विश्राम मेरी प्यारी दी ☺️🙏🌹

Rama Devi Sahu
Aug 14, 2026
कर्मों का हिसाब ⚖️ भगवान शिव और माता पार्वती की एक अद्भुत कथा हम अक्सर छुपकर गलत काम करते हैं और सोचते हैं कि "किसी ने देखा नहीं!" लेकिन हम भूल जाते हैं कि हमारे भीतर बैठी आत्मा रूपी परमात्मा हर कर्म का साक्षी है। मनुष्य द्वारा किए गए हर कर्म का फल उसे स्वयं ही भोगना पड़ता है। आइए, इस रहस्य को शिव-पार्वती की एक कथा से समझते हैं: 🚶♂️ मृत्यु लोक का भ्रमण: एक बार भगवान शिव और माता पार्वती मृत्यु लोक (धरती) के भ्रमण पर निकले। अचानक माता पार्वती एक दृश्य देखकर ठिठक गईं। उन्होंने देखा कि एक कसाई निर्दयता से एक साथ कई पक्षियों की हत्या कर रहा था। ❓ माता पार्वती का प्रश्न: यह देखकर माता व्यथित हो गईं और शिव जी से पूछा— "हे प्रभु! आप कहते हैं कि कर्मों का फल इसी धरती पर भोगना पड़ता है। अब यह बताएं कि यह कसाई कितने जन्म पक्षी के रूप में लेगा और कितनी बार ये पक्षी मनुष्य जन्म लेंगे? यह हिसाब कैसे बराबर होगा?" प्रभु मुस्कुराए और पार्वती जी से बोले, "आओ, आगे चलें।" 👁️ कर्मों का चक्र (प्रभु का उत्तर): कुछ दूर जाने के बाद प्रभु रुके और माता पार्वती को इशारे से एक और दृश्य दिखाया। वहां एक बड़ा सा जानवर चारा खा रहा था, जिसके शरीर पर एक गहरा जख्म था। बहुत से मांसाहारी पक्षी आते, उस जख्म से मांस नोचते और उड़ जाते। वह जानवर दर्द से तड़प रहा था, लेकिन बेबस था। कुछ ही देर में वहां अन्य मांसाहारी जानवर भी आ गए और उसे नोच-नोच कर खाने लगे। तड़प-तड़प कर उस बेबस जानवर ने प्राण त्याग दिए। शिव जी ने कहा— "सुनो पार्वती! यह तड़पने वाला जानवर पिछले जन्म में वही कसाई था और ये पक्षी व जानवर वो जीव थे, जिनका उसने वध किया था। इन सबने मिलकर एक ही बार में अपना हिसाब बराबर कर लिया। यह जन्म-जन्मांतर का चक्र है, जो तब तक चलता है जब तक सबका हिसाब-किताब बराबर न हो जाए।" 💡 कहानी की सीख: कोई भी कर्म करने से पहले विचार अवश्य करें! प्रकृति का न्याय बहुत सटीक होता है और यहाँ हर कर्म का हिसाब चुकाना पड़ता है। "इसलिए भूलकर भी कभी बेजुबान जीवों को कष्ट न दें, मांसाहार से बचें और यदि आप खाते हैं, तो आज ही इसे छोड़ने का संकल्प लें।" 🙏

Rama Devi Sahu
Aug 14, 2026
" Ishwar ke Aashirwad se Shukh Shanti Samriddhi Aap ke Jeevan me Hamesha Banaye Rakhe 🌹 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹 Shubha Ratri Meri Pyari Choti Behan ❤️🌹😊

R k jangid phulera Jaipur
Aug 14, 2026
जय मां गंगे की🌹🙏

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Aug 14, 2026
जय शिव शंकर शंभू सुप्रभात हमेशा एक वृक्ष की तरह रहो। अपना सिर ऊंचा रखो, अपने पैर ज़मीन पर जमाए रखो और हमेशा दूसरों को अपनी छाया देने के लिए तैयार रहो।

Saumya Sharma
Aug 14, 2026
जय माता दी 🙏 शुभ शुक्रवार की शुभकामनाएं 🙏🌹☺️ शुभ मंगलकामनाओं के साथ सुप्रभात वंदन मेरी प्यारी दीदी 🙏🌹☺️
