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हम जो निकले शैल करने! हमारे भी कुछ अरमान थे!! एक तरफ थी झाडी़या! दुखी तरफ श्मशान थे!! अचानक पैर टिका हड्डी पे! उस हड्डी के यह बयान दे!! कि एक मुसाफीर देख के चल! हम भी कभी इंसान थे!!

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