
Rama Devi Sahu
167 days ago
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएँ अत्यंत अद्भुत और रहस्यमयी हैं। वे जितने करुणामय हैं, उतने ही नटखट भी। वे अपने भक्तों की रक्षा तो करते ही हैं, साथ ही कभी-कभी उनसे बालसुलभ खेल भी करते हैं। किंतु भगवान की हर लीला में भक्तों के लिए कोई न कोई कल्याणकारी संदेश और लाभ अवश्य छिपा होता है।❤️ ऐसी ही एक मनोरम कथा भगवान के जगन्नाथ स्वरूप से संबंधित है।❤️ जगन्नाथपुरी के सिंहद्वार के समीप उनके परम भक्त रघुदास निवास करते थे। वे वहाँ के राजा के गुरु भी थे। रघुदास जी की भक्ति इतनी निष्कलंक थी कि भगवान स्वयं बालक के रूप में उनके पास आकर उनसे मिलते और उनसे सखा-भाव से बातचीत करते थे। यह बात वहाँ के कई लोग जानते भी थे। एक दिन भगवान जगन्नाथ बालक रूप में रघुदास जी के पास आए और हँसते हुए बोले—🙏 “राजा के पास इतना बड़ा कटहलों का बगीचा है, पर कभी मुझे कटहल का भोग नहीं लगाया जाता। आज मेरा मन पके हुए कटहल खाने का है। चलो, आज हम राजा के बगीचे से कटहल चुराकर लाते हैं।”❤️ रघुदास जी ने विनम्रता से कहा— “प्रभु, यदि आपको कटहल का भोग चाहिए तो मैं राजा से कहकर मंगवा दूँगा। कल आपको विधिपूर्वक भोग लग जाएगा।”❤️ भगवान मुस्कराकर बोले—❤️ “तुम तो जानते ही हो कि माता यशोदा के घर में माखन की कोई कमी नहीं थी, फिर भी मैं पूरे गोकुल में माखन चुराकर खाता था। चोरी करके खाने में एक अलग ही आनंद है। चलो, आज रात हम कटहल चुराने चलते हैं।” भगवान की बाल लीला के आगे रघुदास जी भी क्या करते! वे रात में चुपचाप भगवान के साथ राजा के बगीचे में पहुँच गए। भगवान ने कहा—❤️ “मैं नीचे खड़ा रहता हूँ, तुम पेड़ पर चढ़कर सबसे अच्छा और बड़ा कटहल तोड़कर नीचे गिरा देना, मैं उसे पकड़ लूँगा।” रघुदास जी पेड़ पर चढ़ गए और एक-एक कटहल दिखाकर पूछने लगे—❤️ “प्रभु, यह वाला तोड़ूँ? या यह वाला?”❤️ भगवान ने एक बड़े और पके हुए कटहल की ओर संकेत किया।❤️ रघुदास जी ने जैसे ही वह कटहल तोड़कर नीचे गिराया, उसी क्षण भगवान वहाँ से अंतर्ध्यान हो गए। कटहल के गिरने की आवाज सुनकर राजा के सिपाही वहाँ पहुँच गए। उन्होंने देखा कि राजा के गुरु रघुदास जी स्वयं पेड़ पर चढ़े हुए हैं। यह देखकर वे आश्चर्यचकित रह गए और तुरंत जाकर राजा को इसकी सूचना दी।❤️ राजा स्वयं बगीचे में आए। अपने गुरु को इस स्थिति में देखकर वे अत्यंत चकित हुए। उन्होंने विनम्रतापूर्वक कारण पूछा। रघुदास जी ने कहा—❤️ “राजन, इसका कारण मैं आपको एकांत में बताऊँगा।” राजा अपने गुरु की भक्ति से परिचित थे और जानते थे कि भगवान उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन देते हैं। जब रघुदास जी ने पूरी घटना सुनाई, तो राजा को पूर्ण विश्वास हो गया। वे भावविभोर होकर बोले—❤️ “गुरुदेव, यह पूरा कटहलों का बगीचा आज से प्रभु के नाम समर्पित है। आप जब चाहें, जितना चाहें, भगवान को कटहल का भोग लगाइए।”❤️ अगली सुबह जब रघुदास जी समुद्र तट पर गए, तो वहाँ भगवान फिर बालक रूप में प्रकट हुए और मुस्कराकर बोले— “कहो रघुदास! रात की लीला कैसी रही?” रघुदास जी हँसते हुए बोले—❤️ “प्रभु, हम तो पकड़े ही गए और आप तो बीच में अंतर्ध्यान हो गए। एक कटहल भी नहीं ला पाए। लेकिन देखिए, आपकी कृपा से पूरा बगीचा ही आपके नाम हो गया।” भगवान की लीलाएँ ऐसी ही अद्भुत होती हैं—वे अपने भक्तों के साथ खेल भी खेलते हैं और अंततः उन्हें महान लाभ भी प्रदान करते हैं।❤️ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे🙏 हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे🙏

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