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*वृद्धाश्रम में बाप को छोड़कर बेटा जाने ही वाला था।* तभी उसकी नज़र पड़ी—उसका पिता वृद्धाश्रम के संचालक से हँसते हुए बात कर रहा था। बेटा ठिठक गया। उसने आश्चर्य से पूछा, *“आप मेरे पापा को कैसे जानते हैं?”* संचालक मुस्कुराया और बोला *“आज से तीस साल पहले, तुम्हारे पिता हमारे अनाथ आश्रम से एक बच्चा गोद लेकर गए थे।”* बेटे की आँखें भर आईं… उसे समझ आ गया कि *कभी-कभी अच्छे कर्म करने की भी कीमत चुकानी पड़ती है।* *➥ संदेश (Moral):-* जो हमें जीवन देता है, उसे जीवन के अंतिम पड़ाव पर अकेला छोड़ना सबसे बड़ा पाप है। *माता-पिता की सेवा कोई बोझ नहीं, बल्कि सौभाग्य है। 👏*

Comments (2)

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

May 25, 2026

🕉️ namaha shivay stay blessed and healthy 🕉️ tatsat

सविता

सविता

May 25, 2026

om namah shivay 🙏🌹 shubh prabhat vandan ji