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Rama Devi Sahu

311 days ago

🪔🌼❤️ भाई दूज ❤️🌼🪔 👫👫👫👫👫👫👫👫👫 🪔 पंच दिवसीय दीपावली महोत्सव भाई दूज पर्व के साथ समाप्त होता है। भाई दूज 23 अक्टूबर गुरुवार को मनाया जाएगा।🌹💕 आप सभी सनातन प्रेमियों को पावन पर्व भाई दूज की हार्दिक शुभकामनाएं.!!🌹💕 भाई दूज का त्यौहार हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं। यह त्यौहार भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। भाई दूज के दिन भाई, बहिन के घर का ही खाना खाए। ऐसा करने से भाई की आयुवृद्धि होती है। पहला कौर बहिन के हाथ से खाएं। स्कंदपुराण के अनुसार इस दिन जो बहिन के हाथ से भोजन करता है, वह धन एवं उत्तम सम्पदा को प्राप्त होता है। अगर बहिन न हो तो मुँहबोली बहिन या मौसी/मामा की पुत्री को बहिन मान ले। अगर वह भी न हो तो किसी गाय अथवा नदी को ही बहिन बना ले और उसके पास भोजन करे। कहने का आश्रय यह है की यम द्वितीया को कभी भी अपने घर भोजन न करे। आज के दिन बहिन अपने भाई की ३ बार आरती जरूर उतारे। आज के दिन बहिन भाई को तथा भाई बहिन को कोई न कोई उपहार जरूर दे। स्कंदपुराण के अनुसार विशेषतः वस्त्र तथा आभूषण। आज के दिन भाई बहिन का यमुनाजी में नहाना भी बहुत शुभ है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुनाजी में स्नान करने वाला पुरुष यमलोक का दर्शन नहीं करता। नारदपुराण के अनुसार- ऊर्ज्जशुक्लद्वितीयायां यमो यमुनया पुरा।। भोजितः स्वगृहे तेन द्वितीयैषा यमाह्वया।। पुष्टिप्रवर्द्धनं चात्र भगिन्या भोजनंगृहे।। वस्त्रालंकारपूर्वं तु तस्मै देयमतः परम्।। यस्यां तिथौ यमुनया यमराजदेवः संभोजितो निजकरात्स्वसृसौहृदेन।। तस्यां स्वसुः करतलादिह यो भुनक्ति प्राप्नोति रत्नधनधान्यमनुत्तमं सः।। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पूर्वकाल में यमुनाजी ने यमराज को अपने घर भोजन कराया था, इसलिए यह ‘यमद्वितीया’ कहलाती है। इसमें बहिन के घर भोजन करना पुष्टिवर्धक बताया गया है। अतः बहिन को उस दिन वस्त्र और आभूषण देने चाहिए। उस तिथि को जो बहिन के हाथ से इस लोक में भोजन करता है, वह सर्वोत्तम रत्न, धन और धान्य पाता है। सनतकुमार संहिता में कहा गया है कि जो स्त्री कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को अपने भाई को आदरपूर्वक बुलाकर सुरुचि पूर्वक भोजन कराती है तथा भोजन के बाद उसे पान खिलाती है वह सदा सुहागन रहती है, साथ ही ऐसी बहन के भाई को भी दीर्घ आयु की प्रप्ति होती है। इसलिए इस दिन बहन के हाथों से पान जरुर खाना चाहिए। कार्तिक शुक्ल द्वितीया की तिथि पर वायुमंडल में यमतरंगों के संचार के कारण वातावरण तप्त ऊर्जा से प्रभारित रहता है। ये तरंगें नीचे की दिशा में प्रवाहित होती हैं। इन तरंगों के कारण विविध कष्ट हो सकते हैं, जैसे अपमृत्यु होना, दुर्घटना होना, स्मृतिभ्रंश होने से अचानक पागलपन का दौरा पडना, मिरगी समान दौरे पडना अर्थात फिट्स आना अथवा हाथ में लिये हुए कार्य में अनेक बाधाएं आना। भूलोक में संचार करनेवाली यम तरंगों को प्रतिबंधित करने के लिए यमादि देवताओं का पूजन करते हैं। पृथ्वी यम की बहन का रूप है। इस दिन यमतरंगें पृथ्वी की कक्षा में आती हैं। इसलिए पृथ्वी की कक्षा में यम तरंगों के प्रवेश के संबंध में कहते हैं कि, कार्तिक शुक्ल द्वितीया की तिथि पर यम अपने घर से बहन के घर अर्थात पृथ्वीरूपी भूलोक में प्रवेश करते हैं। इसलिए इस दिन को यम- द्वितीया के नामसे जानते हैं। यमदेवता के अपनी बहन के घर जाने के प्रतीकस्वरूप प्रत्येक घर का पुरुष अपने ही घर पर पत्नी द्वारा बनाए गए भोजन का न सेवन कर बहन के घर जाकर भोजन करता है। बहन द्वारा यमदेवता का सम्मान करने के प्रतीक स्वरूप यह दिन 'भैय्यादूज’ के नाम से भी प्रचलित है। अंत में आप सभी को भाई दूज पर्व की हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाओं के साथ शुभमस्तु ! 🙏🌷जय यमुना मैया जी 👏 🙏🌷जय श्री राधे कृष्ण जी 👏 🙏🌷जय श्री लक्ष्मी नारायण जी

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Comments (3)

Rakesh Kumar

Rakesh Kumar

Oct 23, 2025

good afternoon ji ❤️❤️❤️❤️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 23, 2025

🌹🌹 Very Good Morning Jii 🌹🌹