
SHREE SHARMA
4 hours ago
श्रीपद्मपुराणोक्त शिवस्तुति॥ एक बार सभी देवी - देवताओं ने भगवान श्री हरि विष्णु नारायण जी से पूछा :~ हे प्रभु !कलियुग में देवाधिदेव आशुतोष औघड़दानी भगवान श्री शिव जी को कैसे प्रसन्न करें? तब भगवान श्री हरि विष्णु नारायण जी ने स्वयं भगवान श्री शिव जी की यह स्तुति की। जो इस स्तुति को श्रावण मास शुक्ल पक्ष के अंतिम सोमवार को पढ़ता है। उसके पूरे सावन के व्रत का फल पूर्ण हो जाता हैं ॥ श्री द्मपुराण के उत्तर-खण्ड के अध्याय २३५-२३६ में इक्कीस (२१) श्लोकों में वर्णित है। जिसे भगवान श्री हरि विष्णु नारायण जी ने समस्त देवी-देवताओं के सम्मुख प्रकट किया था॥ ॥ पद्मपुराणोक्त श्रीबिष्णु कृत: सम्पूर्ण शिव स्तुति ॥ नमस्ते रुद्र रूपाय विष्णवे परमात्मने। सत्त्वोद्रिक्ताय शुद्धाय शिवाय परमात्मने॥१॥ नमः पञ्चमुखायैव त्रिनेत्राय च वै नमः। नमो दशभुजायैव दशपादाय वै नमः॥२॥ नमो भस्माङ्गरागाय चर्माम्बरधराय च। कपालमालाधाराय नमो वै शंकराय च॥३॥ 🌹गङ्गाधराय देवाय जटाधराय वै नमः। त्र्यम्बकाय नमस्तुभ्यं त्रिपुरघ्नाय वै नमः॥४॥ 🌹नमः सोमाय रुद्राय शर्वाय वरदाय च। पशूनां पतये नित्यं नमोऽस्तु परमात्मने॥५॥ भक्तानामार्तिनाशाय भक्तानुग्रहकारिणे। सर्वेषां चैव भूतानामधिपाय नमो नमः॥६॥ ॐ नमः शिवाय शान्ताय ब्रह्मणे परमात्मने। त्वमेव जगतां नाथो जगत्कर्ता जगत्पतिः॥७॥ 🌹त्वमेव परमं ब्रह्म त्वमेव परमं तपः। त्वमेव परमं सत्यं त्वमेव परमा गतिः॥८॥ त्वं ब्रह्मा सृष्टिकर्ता च त्वं विष्णुः परिपालकः। त्वं रुद्रः प्रलयकर्ता च सर्वकर्ता त्वमेव हि॥९॥ 🌹 त्रिमूर्तिरपि यो देवस्त्रिगुणात्मा सदाशिवः। अर्धनारीश्वरो देवः नमस्तुभ्यं महात्मने॥१०॥ नीलकण्ठ नमस्तुभ्यं कालकूटविषाशन। कैलासवासिने नित्यं नमस्ते परमेश्वर॥११॥ 🌹 नमस्ते भूतनाथाय भूतानां पतये नमः। दिगम्बराय देवाय नमस्ते विश्वसाक्षिणे॥१२॥ 🌹 वृषवाहन देवेश सर्वलोकनमस्कृत। उमाकान्त नमस्तुभ्यं उमादेहार्धधारिणे॥१३॥ महादेव नमस्तुभ्यं महेश्वर नमोऽस्तु ते। योगीन्द्राणां नमस्तुभ्यं योगिनां गुरवे नमः॥१४॥ अनादये नमस्तुभ्यं नमस्ते चादिरूपिणे। अनन्तरूपिणे तुभ्यं नमस्ते बहुरूपिणे॥१५॥ 🌹नमस्ते मृत्युंजयायैव कालकालाय वै नमः। कालान्तकाय देवाय नमस्ते कालरूपिणे॥१६॥ त्वं गतिस्त्वं मतिश्चैव त्वं धाता त्वं विधायकः। कर्ता हर्ता च भर्ता च त्वमेव परमेश्वरः॥१७॥ 🌹अपराधं क्षमस्वाद्य प्रसादं कुरु मे प्रभो। भक्तिं प्रयच्छ मे देव मुक्तिं चैव प्रयच्छ मे॥१८॥ 🌹 यथा त्वं देवदेवेशः सर्वेषां वन्द्य एव च। तथा मां पाहि देवेश दुःखादस्माद्भवार्णवात्॥१९॥ इदं स्तोत्रं महापुण्यं विष्णुना परिकीर्तितम्। यः पठेच्छ्रावणे मासि सोमवारे विशेषतः॥२०॥ तस्य पुण्यफलं वक्तुं ब्रह्मणापि न शक्यते। शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥२१॥ ॥ इति श्रीपद्मपुराणे उत्तरखण्डे विष्णुकृता शिवस्तुतिः सम्पूर्णा॥

Comments (1)

Rama Devi Sahu
Aug 25, 2026
🕉️🔱 ॐ नमः शिवाय 🕉️🔱