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Rama Devi Sahu

282 days ago

* गुरु महिमा * 🔷 एक भंवरा हर रोज किसी फूलों के बाग में जाता है और जिस जगह से वह गुजरता है, वहाँ एक गंदा नाला पड़ता है । उस नाले में एक कीड़ा रहता है । क्योंकि वह भंवरा हर रोज उस नाले के ऊपर से होकर जाता है, इसलिए एक दिन उस भंवरे की नजर उस गंदे नाले के कीड़े पर पड़ी । उस कीड़े को देखकर उस भंवरे को दया आ गई । 🔷 वह भंवरा सोचने लगा - "बेचारा, यह कीड़ा ! कैसे इस नाले में रहता होगा ?" भंवरा कीड़े के पास गया और जा करके उससे पूछने लगा - "भाई ! तुम यहाँ इस गंदगी में कैसे रह लेते हो ?" 🔷 इस पर कीड़ा कहने लगा - "यह तो मेरा घर है और मैं अपने घर में रहता हूँ, जैसे और भी रहते हैं ।" 🔷 भंवरा कीड़े को समझाने लगा - "अरे, तुम मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें जन्नत की सैर करवाऊँगा ।" 🔷 कीड़े ने कहा - "नहीं, भैया ! मैं नहीं जाऊँगा । मेरे लिए तो यही मेरी जन्नत है ।" 🔷 भंवरा समझाता है - "अरे, भाई ! तुम मेरे साथ चलो तो सही, मुझसे दोस्ती तो करो ।" 🔷 जब भंवरे ने इतने प्रेम से बात कही तो कीड़े ने अपना दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया और भंवरे के साथ चलने के लिए तैयार हो गया । भंवरे ने कहा - "मित्र ! मैं कल आऊँगा और तुम्हें अपने साथ ले जाऊँगा ।" 🔷 अगले दिन सुबह जब भंवरा फूलों के बाग में जाने लगा तो वह पहले उस कीड़े को लेने के लिए उसके पास आया और भंवरा कीड़े को अपने कंधे पर बैठाकर फूलों के बाग में ले गया । फिर भंवरा उस कीड़े को एक कमल के फूल पर बैठाकर खुद फूलों का रस चूसने लगा । 🔷 पूरा दिन बाग में यहाँ वहाँ भंवरे ने फूलों के रस को चखा । अब शाम होने लगी, भंवरे का लौटने का समय हुआ । लेकिन भूल वश भंवरा उस कीड़े को वहीं छोड़कर चला गया, जिस फूल पर भंवरे ने कीड़े को बैठाया था । सूर्य अस्त हुआ और उस कमल के फूल की पंखुड़ियाँ बन्द होने लगीं । कीड़ा भी फूल के भीतर कैद हो गया । 🔷 अगले दिन सुबह जब माली के द्वारा माला बनाने के लिए फूलों को तोड़ा गया तो उस फूल को भी तोड़ा गया जिसमें वह कीड़ा बैठा था । माली ने फूलों की माला बनाकर बांके बिहारी जी के मन्दिर भेज दी । उस माला में वह फूल भी गुंथा हुआ था जिसमें वह कीड़ा बैठा था और वही माला बिहारी जी के गले में पहना दी गयी । फिर पूरे दिन के बाद वही माला यमुना जी में प्रवाहित कर दी गयी और वह कीड़ा यह सब देख देखकर निहाल हो गया । 🔷 कीड़ा कहता है - "वाह रे, भंवरे ! तेरी दोस्ती कहाँ मैं उस गंदी नाली में रेंगने वाला कीड़ा था और तेरी दोस्ती ने मुझे कहाँ पहुँचा दिया ! बिहारी जी के गले से होकर कहाँ मैं यमुना जी में गोते खा रहा हूँ ।" 🔶 विचार कीजिये कि यह भंवरा कौन है ? यह भंवरा ही सद्गुरु है और वह कीड़ा कोई और नहीं, वह स्वयं हम ही हैं । इसलिए सदगुरु का हाथ पकड़ कर चलो । किसी के पैर पकड़ने की नौबत ना आये ।ॐ ॐ

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Comments (12)

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Nov 21, 2025

aap bde ho humse bde hone k liye shukriya m b to apse sekh rha hu dhree dhree 😊😊

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Nov 21, 2025

okay 😊 Jante ho, Samay samay pr chote se bhi kuch sikhna padta hai...isi liye kah diya....

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Nov 21, 2025

are itni बड़ी उपाधि mat do wo b गुरु ki jo acha aur सही lgta h jo smz me aata whi message hota h

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Nov 21, 2025

Ji, Dhanyawad 🙏 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Sandhya Vandan 🙏🌹🪔🌹🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Nov 21, 2025

Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Sandhya Vandan 🙏🌹🪔🌹🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Nov 21, 2025

Dhanyawad Bhai ❤️ Aap bhi tho Ek Guru ki tarah Massage dete ho.... Ji...

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Nov 21, 2025

Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Sandhya Vandan 🙏🌹🪔🌹🙏

sandhya bali

sandhya bali

Nov 21, 2025

bahut Sundar kya baat hai

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

Nov 21, 2025

🌿🥀🙏 Jai shree krishna radhe radhe ji 🙏🥀🌿 subha sandhya subhechha o shubh kamnaye ke saath 🤗❤️🌹🌹