
Rama Devi Sahu
276 days ago
सूर्य सप्तमी हिंदू संस्कृति और आस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विशेष रूप से सूर्य देव की आराधना और उनके कृपा-प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य का मुख्य स्रोत माना गया है, इसलिए यह दिन उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और आध्यात्मिक रूप से ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। सूर्य सप्तमी कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है, लेकिन पंचांग की गणनाएँ कई बार जटिल होने के कारण लोगों में वास्तविक तिथि को लेकर भ्रम बना रहता है। इसी कारण इस वर्ष भी यह प्रश्न कई स्थानों पर उठ रहा है कि सूर्य सप्तमी 26 नवंबर को मनाई जाए या 27 नवंबर को। सूर्य सप्तमी का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन भक्तजन प्रातःकाल सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं, उपवास रखते हैं और उनके नाम का जप व स्तोत्र का पाठ करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ दूर होती हैं, मानसिक शांति की प्राप्ति होती है और ऊर्जा बढ़ती है। इसके अतिरिक्त, सूर्य की कृपा से व्यक्ति के कार्यों में सफलता और जीवन में सकारात्मकता आती है। पंचांगों और ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष सूर्य सप्तमी की शुभ तिथि 27 नवंबर 2025 को मान्य है। इस दिन सूर्योदय के समय अर्घ्य देकर सूर्य देव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। अतः सही तिथि का ज्ञान रखना और शास्त्रोक्त विधि से पूजा करना इस पर्व के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ा देता है। मित्र सप्तमी की सरल पूजन विधि: मित्र सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा सूर्योदय के समय करना सबसे शुभ माना जाता है: - सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। - तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें। उसमें लाल चंदन, लाल फूल गुलाब या गुड़हल, अक्षत/ चावल और थोड़ा-सा गुड़ या शक्कर मिलाएं। सूर्योदय के समय, सूर्य की ओर मुख करके खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को ऊपर उठाकर, लोटे के जल को धीरे-धीरे धार बनाकर सूर्य देव को अर्पित करें। - मंत्र जाप: अर्घ्य देते समय 'ॐ मित्राय नमः' या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करें। - दिन भर व्रत रखें, सिर्फ फलाहार कर सकते हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद व्रत खोलें। जानें संतान प्राप्ति के लिए विशेष उपाय: मित्र सप्तमी का व्रत संतान की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है: 1. दूध मिश्रित अर्घ्य: संतान प्राप्ति की कामना करने वाले दंपत्ति, सूर्य देव को अर्घ्य देते समय जल में दूध और गुड़ मिलाकर अर्पित करें। 2. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ: इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना विशेष रूप से लाभकारी होता है। पति-पत्नी दोनों मिलकर सूर्य के समक्ष इस स्तोत्र का पाठ करें। 3. गेहूं का भोग: पूजा के बाद भगवान सूर्य देव को गेहूं से बने पकवान या गुड़ और गेहूं का भोग लगाएं और इसे प्रसाद के रूप में स्वयं ग्रहण करें। 4. अखंड दीपक: संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाली महिलाएं पूजा स्थान पर शुद्ध घी का एक अखंड दीपक जलाएं और उसे पूरे दिन प्रज्वलित रखें। 🌺🌺🌺🌺 जय श्री सूर्य नारायण 🌺🌺🌺🌺 🌺 सूर्य सप्तमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🌺
Comments (5)

Rama Devi Sahu
Nov 27, 2025
🙏🔱 Har Har Mahadev 🔱🙏

H.S.CHAHAR
Nov 27, 2025
🚩🔔ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः भगवान हरि विष्णु आप पर अपनी कृपा बनाए रखें माता लक्ष्मी की कृपा आपके सदा बनी रहे आप और आपका पूरा परिवार मस्त रहे शुभ बृहस्पतिवार मंगलमय हो🚩🙏



