
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
225 days ago
🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞 ⛅दिनांक - 17 जनवरी 2026 ⛅दिन - शनिवार ⛅विक्रम संवत् - 2082 ⛅अयन - उत्तरायण ⛅ऋतु - शिशिर ⛅मास - माघ ⛅पक्ष - कृष्ण ⛅तिथि - चतुर्दशी रात्रि 12:03 जनवरी 18 तक तत्पश्चात् अमावस्या ⛅नक्षत्र - मूल सुबह 08:12 तक तत्पश्चात् पूर्वाषाढा ⛅योग - व्याघात रात्रि 09:18 तक तत्पश्चात् हर्षण ⛅राहुकाल - सुबह 09:54 से सुबह 11:15 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅सूर्योदय - 07:10 ⛅सूर्यास्त - 06:04 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में ⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:15 से दोपहर 12:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:11 जनवरी 18 से रात्रि 01:03 जनवरी 18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) 🌥️विशेष - चतुर्दशी के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹आरोग्यप्रदायक मंत्र 🔹 ☀️सूर्य मंत्र☀️ गर्मी से उत्पन्न शारीरिक रोग, बुद्धि की विकलता ( उन्माद, पागलपन) अथवा दुर्वलता, दृष्टी-रोग, अग्नि-तत्त्व की विषमता, शरीर में जलन आदि हो तो इनके निवारण के लिए सूर्य मंत्र है । किसी भी अमावस्या को ४० बार जप करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है : ॐ नमोऽस्तु दिवाकराय अग्नितत्त्वप्रवर्धकाय शमय शमय शोषय शोषय अग्नितत्त्वं समतां कुरु कुरु ॐ ।। 🔸चन्द्र मंत्र🔸 शीत से उत्पन्न वायु-प्रधान रोगों में चन्द्र मंत्र से लाभ होता है मंत्र है : ॐ चन्द्रो में चान्द्रमसान् रोगानपहरतु । औषधिनाथाय वै नम: । ॐ स्वात्मसम्बन्धिन: सर्वत: सर्वरोगान् शमय शमय तत्रैव पातय पातय । शक्तिं चोद्भावयोद्भावय ।। किसी पर्व अथवा पुण्य दिवस पर चन्द्र मंत्र का २०० बार ( दो माला ) जप करने से मंत्र सदा के लिए सिद्ध हो जाता है । और अगर चन्द्रग्रहण के समय जप कर लिया जाय तो केवल २०-२५ बार जप करनेमात्र से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है । मंत्रसिद्धि के बाद इनमें से जिस मंत्र की आवश्यकता हो उसका पानी में देखते हुए ५, ७ या ११ बार जप करें । यह अभिमंत्रित जल रोगी को स्पर्श कराने , लगाने, पिलाने और उससे स्नान कराने से भी बहुत लाभ होगा । इन मंत्रों का उपयोग अपने परिचितों, हितैषियों के लिए भी कर सकते हैं, अपने लिए भी कर सकते हैं ।

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