
Rama Devi Sahu
389 days ago
🙏‼️ Radhey Radhey ‼️🙏 Dt.06.08.2025 (Wednesday) ***************************** बुज़ुर्ग कहते हैं कि जब भी मंदिर में दर्शन के लिए जाओ, तो दर्शन करने के बाद बाहर आकर मंदिर की सीढ़ियों या ओटे पर कुछ देर बैठना चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस परंपरा के पीछे क्या कारण है? आजकल कुछ लोग मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर अपनी पारिवारिक, व्यवसायिक या राजनीतिक बातें करने लगते हैं। परंतु यह प्राचीन परंपरा एक विशेष उद्देश्य से बनी थी। असल में, मंदिर की सीढ़ी पर बैठकर हमें एक श्लोक का उच्चारण करना होता है। आज के समय में कई लोग इस श्लोक को भूल चुके हैं। आइए, इस श्लोक को सुनें और अगली पीढ़ी को भी इसे जरूर सिखाएं। यह श्लोक इस प्रकार है – अनायासेन मरणम्, विना देन्येन जीवनम्। देहान्ते तव सान्निध्यम्, देहि मे परमेश्वरम्।। इस श्लोक का अर्थ: 🔸 अनायासेन मरणम् – अर्थात शरीर या मन को कोई कष्ट न हो और सहज रूप से मृत्यु हो। बीमारी में तड़पकर, बिस्तर पर पड़े-पड़े दुःख सहते हुए मृत्यु न हो। चलते-फिरते, बिना कष्ट के शरीर त्याग हो। 🔸 विना देन्येन जीवनम् – अर्थात जीवन कभी भी दूसरों पर आश्रित न हो। जैसे कुछ लोग लकवा या दुर्बलता के कारण दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं – वैसा जीवन न हो। भगवान की कृपा से आत्मनिर्भर जीवन मिले, जिसमें किसी से भीख मांगने की नौबत न आए। 🔸 देहान्ते तव सान्निध्यम् – अर्थात शरीर छोड़ते समय प्रभु, आप स्वयं हमारे पास हों। जैसे भीष्म पितामह के शरीर त्याग के समय श्रीकृष्ण उनके सामने खड़े थे – वैसे ही मृत्यु के समय भगवान का साक्षात दर्शन हो। 🔸 देहि मे परमेश्वरम् – हे परमेश्वर! मुझे ऐसा ही जीवन वरदान रूप में दीजिए। यह प्रार्थना कीजिए… कार, बेटा, बेटी, पति, पत्नी, घर, धन-संपत्ति जैसी चीजें मत मांगिए – यह सब भगवान आपकी पात्रता के अनुसार स्वयं ही देते हैं। इसलिए मंदिर में दर्शन के बाद सीढ़ी पर बैठकर यह प्रार्थना अवश्य करें। यह प्रार्थना है, याचना नहीं। याचना सांसारिक चीजों के लिए होती है – घर, पैसा, नौकरी, बच्चे, सुख-सुविधाएं आदि। यह मांग या भीख कहलाती है। लेकिन प्रार्थना का अर्थ है – विशेष, श्रेष्ठ विनती। ‘प्रा’ मतलब विशेष, और ‘अर्थना’ मतलब साद या निवेदन। हम ठाकुरजी के सामने विशेष निवेदन रखते हैं। और उस विशेष निवेदन के लिए यही श्लोक बोला जाता है। --- #सबसे_महत्त्वपूर्ण_बात – जब आप मंदिर में दर्शन करने जाएं, तो आंखें खुली रखें और भगवान का दर्शन करें, उन्हें दृष्टि से निहारें। उनका पूरा स्वरूप, चरण, मुखमंडल, आभूषण, मूर्ति की सुंदरता आंखों में बसा लें। कुछ लोग दर्शन करते समय आंखें बंद कर लेते हैं। ऐसा क्यों? हम वहां दर्शन के लिए ही तो आए हैं! तो फिर आंखों से निहारना आवश्यक है। दर्शन करने के बाद जब आप मंदिर की सीढ़ी पर बैठें, तब आंखें बंद कर उस दर्शन का स्मरण करें। अगर भगवान का स्वरूप याद न आ रहा हो, तो दोबारा जाकर दर्शन करें। फिर आंखें बंद करें और ऊपर दिया गया श्लोक जपें। यही शास्त्र है, यही हमारे बुजुर्गों की सीख है!..🙏
Comments (14)

Radhe Radhe
Aug 6, 2025
ॐगं गणपतिये नमो नमः अष्टविनायक नमो नमः गणपति बप्पा मोरया 🍃 श्री गणेश भगवान जी की कृपा आप पर सदैव बनीरहे।। शुभ संध्या की शुभकामनाएं जी।।🌹🌹

Radhe Radhe
Aug 6, 2025
आपको अगस्त महीने के प्रथम बुधवार शुभ संध्या की हार्दिक शुभकामनाएं राधे राधे जय श्री कृष्ण जी।।🙏🙏

Rama Devi Sahu
Aug 6, 2025
Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Dopahar Jii 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Aug 6, 2025
Dhanyawad 🙏 Radhey Radhey

Rama Devi Sahu
Aug 6, 2025
Mangal Kamanayen ke Sath Subha Dopahar Jii 🙏 Bhagwan Shri Ganesh ji ki Aashirwad Aap pr Sadeib Bani Rahe 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Aug 6, 2025
Mangal Kamanayen ke Sath Subha Dopahar Jii 🙏 Bhagwan Shri Ganesh ji ki Aashirwad Aap pr Sadeib Bani Rahe 🙏🌹🌹

Deepak karki
Aug 6, 2025
🌹🙏राम राम जी राधे राधे 🌹🙏

Girish Kumar
Aug 6, 2025
🌹Radhey Radhey 🙏 Jai Shri Krishna 🙏 Om Shri Ganeshay Namh 🙏 Shubh Prabhat Vandan 🙏 🌹🙏

hansu parjapti
Aug 6, 2025
ji bilkul sahi hai ji 🌹
