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*ज्योतिष में 15 तिथियां और उनके स्वामी देवता* हिंदू पंचांग में एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं - 15 शुक्ल पक्ष की और 15 कृष्ण पक्ष की। दोनों पक्षों की तिथियों के स्वामी देवता समान होते हैं। **तिथि** **नाम** **तिथि स्वामी** **फल/विशेष** 1 प्रतिपदा अग्नि देव गृह-निर्माण, यात्रा के लिए शुभ 2 द्वितीया ब्रह्मा जी विवाह, मांगलिक कार्य शुभ 3 तृतीया गौरी/पार्वती सौंदर्य, आभूषण, स्त्री संबंधी कार्य 4 चतुर्थी गणेश जी विघ्न-नाश, शिक्षा आरंभ। कृष्ण पक्ष में रिक्ता 5 पंचमी नाग देवता/सर्प औषधि, तंत्र-मंत्र, नाग पूजा 6 षष्ठी कार्तिकेय संतान, युद्ध, शत्रु-नाश के लिए 7 सप्तमी सूर्य देव आरोग्य, राज्य, पद-प्राप्ति 8 अष्टमी शिव जी तंत्र, साधना। कृष्ण पक्ष जन्माष्टमी 9 नवमी दुर्गा माता शक्ति पूजा, शस्त्र-धारण 10 दशमी यमराज यम-पूजा, विवाद निपटारा 11 एकादशी विश्वेदेव व्रत-उपवास, विष्णु पूजा। सभी सिद्धि दायिनी 12 द्वादशी विष्णु जी धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य 13 त्रयोदशी कामदेव प्रेम, दांपत्य सुख। प्रदोष व्रत 14 चतुर्दशी शिव जी/रुद्र घोर कार्य, शस्त्र, श्मशान संबंधी। रिक्ता तिथि 15 पूर्णिमा चंद्रमा मांगलिक कार्य, यज्ञ, लक्ष्मी पूजा 15 अमावस्या पितर पितृ-तर्पण, श्राद्ध, दान। कोई शुभ कार्य नहीं *महत्वपूर्ण बातें:* 1. *नंदा तिथि*: प्रतिपदा, षष्ठी, एकादशी - शुक्र ग्रह की। निर्माण, खेती शुभ। 2. *भद्रा तिथि*: द्वितीया, सप्तमी, द्वादशी - बुध ग्रह की। यात्रा, लेन-देन शुभ। 3. *जया तिथि*: तृतीया, अष्टमी, त्रयोदशी - मंगल ग्रह की। युद्ध, वाद-विवाद में विजय। 4. *रिक्ता तिथि*: चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी - शनि ग्रह की। शुभ कार्य वर्जित। केवल तंत्र, शस्त्र, अग्नि कार्य। 5. *पूर्णा तिथि*: पंचमी, दशमी, पूर्णिमा/अमावस्या - गुरु ग्रह की। सभी मांगलिक कार्य शुभ। *तिथि का क्षय-वृद्धि*: कभी-कभी एक ही दिन 2 तिथि या एक तिथि का लोप हो जाता है। इसलिए व्रत-त्योहार के लिए पंचांग देखना जरूरी।

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