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आयुर्वेद और योगशास्त्र के अनुसार, शरीर में 72,000 नाड़ियाँ होती हैं जो ऊर्जा के प्रवाह के मार्ग हैं। इन नाड़ियों को शुद्ध और सक्रिय रखने से शरीर, मन और आत्मा का संतुलन बना रहता है। घरेलू और प्राकृतिक उपाय जो नाड़ियों को सक्रिय रखते हैं: 1. *प्राणायाम (श्वसन क्रिया)*: अनुलोम-विलोम (नाड़ीशोधन) - धीरे-धीरे श्वास अंदर लेना और छोड़ना। इससे नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं और ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है। 2. *सूर्यनमस्कार*: सभी मांसपेशियों, जोड़ों और नाड़ियों को सक्रिय रखता है। सुबह 12 सूर्यनमस्कार करने से पूरी नाड़ी प्रणाली जागृत रहती है। 3. *घी वाला दूध*: रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में 1 चम्मच घी मिलाकर पीने से नाड़ियों, मज्जा तंत्र और मस्तिष्क के लिए पौष्टिक होता है। 4. *तिल का तेल मसाज (अभ्यंग)*: सिर और शरीर पर गर्म तिल के तेल की मालिश करने से रक्त संचार सुधरता है और नाड़ियों में रुकावटें कम होती हैं। 5. *नींद और दिनचर्या*: रात में अच्छी नींद (7-8 घंटे) नाड़ियों के पुनर्भरण के लिए आवश्यक है। नियमित नींद और जागने का समय बनाए रखना चाहिए। 6. *आहार में सुधार*: ताजे फल, सब्जियां, अंकुरित अनाज, सूखे मेवे शामिल करने चाहिए। अधिक नमकीन, अधिक तीखा और तले हुए भोजन से बचना चाहिए। भरपूर मात्रा में गुनगुना पानी पीना चाहिए। 7. *ध्यान और मंत्र जप*: "ॐ" का उच्चारण या साधारण ध्यान प्राण शक्ति के प्रवाह को सुचारु करता है और नाड़ियों को संतुलित रखता है। तली पाँव सेंकने का प्रयोग: सामग्री: - 1 टब गुनगुना पानी - 4 कपूर की गोलियाँ - 1/2 नींबू का रस - 2 चम्मच नमक (सेंधा नमक या साधारण नमक) - 1 चम्मच हल्दी विधि: 1. एक टब में गुनगुना पानी लें और उसमें कपूर की गोलियाँ, नींबू का रस, नमक और हल्दी मिलाएं। 2. पैरों को टखनों तक पानी में डुबोएं। 3. 15-20 मिनट तक शांति से बैठकर पैरों को पानी में रखें। 4. बाद में पैरों को निकालकर सूखे तौलिये से पोंछ लें। 5. अंत में तिल का तेल या नारियल का तेल हल्के हाथों से पैरों पर मलें। लाभ: - तली पाँव के मर्म बिंदु सक्रिय होते हैं जिससे 72,000 नाड़ियों पर प्रभाव पड़ता है। - रक्त संचार सुधरता है, थकान और दर्द कम होता है। - मज्जा तंत्र मजबूत होता है और तनाव कम होता है। - अच्छी नींद आती है और मस्तिष्क शांत रहता है। - शरीर में प्राण शक्ति संतुलित रहती है। इस प्रयोग को सप्ताह में 2-3 बार रात को सोने से पहले करने से नाड़ियों में प्राण शक्ति का प्रवाह सुधरता है और 72,000 नाड़ियाँ सक्रिय होती हैं।

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