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SHREE SHARMA

2 hours ago

01.🌷रक्षाबंधन: एक पर्व, अनेक आयाम 🌷🌷 (परम्पराएं एवं विधि विधान) 02...🌷 रक्षाबंधन शुभाशीष स्तोत्रम् हिंदी अर्थ सहित 🌷 03..🌷 रक्षा सुमंगल स्तोत्रम् हिंदी अर्थ सहित 🌷 04..🌷रक्षाबंधन पर्व माहात्म्य स्तोत्रम् अर्थ सहित 🌷 🌳रक्षाबंधन महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🌳 🍁 तिथि — श्रावण शुक्ल पूर्णिमा, 28 अगस्त 2026, शुक्रवार 🍁 पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026, प्रातः 09:08 बजे से 28 अगस्त 2026, प्रातः 09:48 बजे तक 🍁 भद्रा रक्षा-सूत्र बाँधने के समय भद्रा नहीं रहेगी; भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी। 🍁 रक्षा-सूत्र बाँधने का शुभ समय प्रातः 05:51 बजे से 09:48 बजे तक (स्थानीय पंचांग के अनुसार; स्थानानुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है।) 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 🌷🌷 रक्षाबंधन : एक पर्व, अनेक आयाम 🌷🌷 (परम्परा, आध्यात्मिक महत्व, धार्मिक संदर्भ एवं विधि-विधान) 🌷 रक्षाबंधन महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🌷 🍁 तिथि — श्रावण शुक्ल पूर्णिमा, शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को प्रातः आरम्भ होकर 28 अगस्त को प्रातः लगभग 9:48 बजे तक रहेगी। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार रक्षासूत्र बाँधने के लिए 28 अगस्त की प्रातः बेला उपयुक्त है और भद्रा सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो जाती है। स्थानानुसार मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 01.🌷रक्षाबंधन: एक पर्व, अनेक आयाम 🌷🌷 (परम्पराएं एवं विधि विधान) --- 🍁 प्रस्तावना रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बाँधने का पर्व नहीं है। यह स्नेह, विश्वास, कर्तव्य, मंगलकामना और पारस्परिक संरक्षण की भारतीय भावना का उत्सव है। राखी का धागा अपने आप में कोई चमत्कारी वस्तु नहीं, बल्कि उसके पीछे स्थित संकल्प और सद्भावना उसका वास्तविक महत्व है। बहन जब भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधती है तो वह उसके दीर्घायु, आरोग्य, यश और मंगल की कामना करती है। भाई भी बहन के प्रति स्नेह, सम्मान, सहयोग और सुरक्षा का संकल्प करता है। इस प्रकार रक्षाबंधन हमें यह शिक्षा देता है कि— रक्षा केवल शरीर की नहीं, सम्मान की भी हो। रक्षा केवल जीवन की नहीं, धर्म और संस्कारों की भी हो। रक्षा केवल परिवार की नहीं, समाज और संस्कृति की भी हो। --- 🕉️ रक्षाबंधन का आध्यात्मिक महत्व भारतीय चिंतन में रक्षा का अर्थ केवल बाहरी संकट से बचाव नहीं है। मनुष्य को अपने भीतर के भय, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और अधर्म से भी रक्षा करनी होती है। इस दृष्टि से रक्षा-सूत्र एक सुंदर आध्यात्मिक प्रतीक है। राखी बाँधते समय मन में यह भाव होना चाहिए— “मैं अपने प्रियजन के जीवन में धर्म, सद्बुद्धि, आरोग्य, सुख और मंगल की कामना करता/करती हूँ।” इसीलिए रक्षाबंधन का वास्तविक संदेश है— 🌷 स्नेह की रक्षा। 🌷 विश्वास की रक्षा। 🌷 नारी-सम्मान की रक्षा। 🌷 परिवार की रक्षा। 🌷 धर्म और संस्कारों की रक्षा। 🌷 प्रकृति और समाज की रक्षा। --- 🍁 धार्मिक एवं पौराणिक संदर्भ रक्षाबंधन के संबंध में भारतीय परंपरा में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं। इनमें कुछ कथाएँ पुराण एवं धार्मिक परंपरा से जुड़ी हैं, जबकि कुछ लोकपरंपरा और लोकप्रिय आख्यानों के रूप में प्रसिद्ध हैं। 🌺 १. इन्द्राणी और देवराज इन्द्र रक्षासूत्र की प्राचीन धार्मिक परंपरा में देवराज इन्द्र के लिए रक्षा-सूत्र बाँधने का प्रसंग विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इन्द्राणी द्वारा मंत्रपूर्वक रक्षा-सूत्र बाँधने की कथा से रक्षा-सूत्र को विजय, मंगल और संरक्षण के संकल्प से जोड़ा जाता है। इसी संदर्भ में प्रसिद्ध रक्षा-मंत्र का पाठ किया जाता है— येन बद्धो बलिर्राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥ भावार्थ— जिस रक्षा-सूत्र से महाबली राजा बलि को बाँधा गया था, उसी रक्षा-सूत्र से मैं तुम्हें बाँधता/बाँधती हूँ। हे रक्षे! तुम अचल रहो, स्थिर रहो और रक्षा करो। --- 🌺 २. भगवान विष्णु और राजा बलि की कथा भारतीय लोक-धार्मिक परंपरा में माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा भी रक्षाबंधन से जोड़ी जाती है। वामन भगवान द्वारा राजा बलि से तीन पग भूमि माँगे जाने के बाद भगवान विष्णु के बलि के द्वार पर रहने की कथा आती है। लोकप्रिय परंपरा में कहा जाता है कि माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा-सूत्र बाँधकर भाई माना और भगवान विष्णु को अपने साथ ले जाने का वर प्राप्त किया। इस कथा का मूल संदेश है— रक्षा-संबंध केवल रक्त-संबंध पर आधारित नहीं होता; प्रेम, विश्वास और वचन भी संबंध को पवित्र

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