
Rama Devi Sahu
207 days ago
क्या आपने कभी यह महसूस किया है कि संकट के समय कोई अदृश्य शक्ति आपको संभाल लेती है? कभी-कभी मन में अचानक राम नाम आ जाता है, और कभी बिना कारण आँखें नम हो जाती हैं… सनातन धर्म कहता है — यह संयोग नहीं, संकेत होते हैं। जब भगवान श्रीराम ने सरयू नदी में अपने शरीर का त्याग कर परमधाम जाने का निर्णय लिया, तब महाबली हनुमान उनके चरणों में गिर पड़े, वे भी प्रभु के साथ जाना चाहते थे। पर प्रभु श्रीराम जानते थे कि कलियुग आने वाला है — ऐसा युग जहाँ भक्ति कठिन होगी, मन चंचल होगा और धर्म की रक्षा के लिए किसी जाग्रत शक्ति की आवश्यकता होगी। तब प्रभु राम ने हनुमान जी से कहा —“तुम पृथ्वी पर रहोगे, मेरे भक्तों की रक्षा करोगे ,राम नाम की ज्योति जलाए रखोगे।” और इसी क्षण हनुमान जी को अजर-अमर होने का वरदान प्राप्त हुआ। यही कारण है कि हनुमान जी आज भी धरा पर हैं, वे गए नहीं… केवल दृष्टि से ओझल हैं। इतिहास, संत परंपरा और भक्तों के अनुभव इस बात के साक्षी हैं कि सच्चे हृदय से पुकारने पर हनुमान जी आज भी मार्गदर्शन करते हैं। ऐसी ही एक अलौकिक और प्रमाणिक घटना महाकवि तुलसीदास जी के जीवन से जुड़ी है। तुलसीदास जी जिन्होंने रामचरितमानस जैसी अमर कृति की रचना की। पर क्या आप जानते हैं कि वे केवल कवि नहीं, साक्षात् रामदर्शी संत थे? भगवान राम के दर्शन की तीव्र अभिलाषा उनके हृदय में सदा जलती रहती थी। उनका जीवन वैराग्य और भक्ति का प्रतीक बन चुका था। यह भक्ति उन्हें अपनी पत्नी रत्नावली से प्राप्त उपदेश के बाद मिली, जिसने उनके भीतर संसार से विरक्ति और राम से एकनिष्ठ प्रेम जगा दिया। काशी में रहते हुए, रामकथा कहते हुए, तुलसीदास जी की भेंट एक ऐसे प्रेत से हुई जो मोक्ष की खोज में भटक रहा था। अनजाने में तुलसीदास जी जिस वृक्ष के नीचे जल छोड़ते थे, वहीं उस प्रेत का वास था। कथा, करुणा और राम नाम के प्रभाव से वह प्रेत प्रसन्न हुआ और बोला —“यदि आप सचमुच प्रभु राम से मिलना चाहते हैं, तो इस जगत में केवल एक ही शक्ति है जो यह संभव कर सकती है — हनुमान जी।” उसने हनुमान जी के आवाहन का उपाय बताया। अब तुलसीदास जी की व्याकुलता और बढ़ गई। उन्होंने सच्चे हृदय से हनुमान जी को पुकारा… और यह पुकार व्यर्थ नहीं गई। हनुमान जी प्रकट हुए। तुलसीदास जी ने चरणों में गिरकर विनती की — “मुझे मेरे प्रभु राम के दर्शन करा दीजिए।” हनुमान जी ने समझाया, बहलाया… पर भक्त का हृदय कहाँ रुकता है? अंततः हनुमान जी बोले —“चित्रकूट चलिए, वहीं दर्शन होंगे।” तुलसीदास जी तुरंत चित्रकूट पहुँचे, रामघाट पर निवास किया और प्रभु की प्रतीक्षा में दिन-रात राम नाम जपने लगे। एक दिन उन्होंने देखा -घोड़े पर सवार दो अत्यंत सुंदर युवक मार्ग से गुजर रहे हैं।उनका तेज, उनका सौम्य स्वरूप… तुलसीदास जी मोहित तो हुए, पर पहचान न सके। जब वे युवक आगे बढ़ गए,हनुमान जी प्रकट हुए और बोले — यही थे आपके प्रभु… श्रीराम और लक्ष्मण। यह सुनते ही तुलसीदास जी फूट-फूट कर रो पड़े। उन्हें लगा जैसे जीवन की सबसे बड़ी चूक हो गई। हनुमान जी ने सांत्वना दी —“कल प्रातः फिर दर्शन होंगे।” अगले दिन स्नान-ध्यान के बाद तुलसीदास जी घाट पर बैठे भक्तों को चंदन लगाने लगे। तभी एक सुंदर बालक उनके पास आया और बोला -“बाबा, क्या हमें चंदन नहीं लगाओगे?” हनुमान जी जानते थे कि इस बार चूक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने तोते का रूप धारण किया और गाने लगे - चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर। तुलसीदास चंदन घिसें, तिलक देत रघुबीर। और उसी क्षण… तुलसीदास जी ने अपने प्रभु को पहचान लिया। यह कोई कथा मात्र नहीं है, यह सनातन धर्म की जीवित परंपरा है। यह प्रमाण है कि हनुमान जी आज भी भक्तों को प्रभु से जोड़ते हैं। यदि आज भी मन से राम नाम लिया जाए, यदि आज भी हनुमान जी को पुकारा जाए तो वे मार्ग अवश्य दिखाते हैं। 🙏🚩🌺।। जय श्री राम ।।🌺🚩🙏 ~~~~~~~~~

Comments (4)

Rama Devi Sahu
Feb 9, 2026
Ji Namaste 🙏 Ram Ram Jii 🙏 Shubha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Feb 9, 2026
Ji Namaste 🙏 Ram Ram Jii 🙏 Shubha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Feb 3, 2026
🙏नमस्ते प्यारी छोटी सुखकर्ता दुखहर्ता विघ्नविनाशी भगवान श्री गणेश जी आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करें। गणपती बप्पा मोरया, शुभ बुधवार!"

Rohit Patel
Feb 3, 2026
जी रमा जी नमस्कार जी.. ॐ 📿🙏💞💞💞 जय सियाराम जय सियाराम 🪷 जय वीर हनुमान जी 🪔🌹🍫📿🙏💞💞💞
