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Rama Devi Sahu

314 days ago

*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 21 अक्टूबर 2025* *⛅दिन - मंगलवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - शरद* *⛅मास - कार्तिक* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅ तिथि - अमावस्या शाम 05:54 तक तत्पश्चात् प्रतिपदा* *⛅नक्षत्र - चित्रा रात्रि 10:59 तक तत्पश्चात् स्वाती* *⛅योग - विष्कम्भ रात्रि 03:17 अक्टूबर 22 तक तत्पश्चात् प्रीति* *⛅राहुकाल - दोपहर 03:04 से शाम 04:30 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:26* *⛅सूर्यास्त - 05:56 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:46 से प्रातः 05:36 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11:48 से दोपहर 12:34 (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:47 से रात्रि 12:37 अक्टूबर 22 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅️व्रत पर्व विवरण - दीपावली, कार्तिक अमावस्या, दर्श अमावस्या, स्वामी रामतीर्थ जयंती एवं पुण्यतिथि* *🌥️विशेष - अमावस्या को स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *🔹प्रकृति अनुसार विहार🔹* *🔹वात प्रकृति🔹* *🔹त्याज्य : अति परिश्रम, अति व्यायाम, सतत अध्ययन, अधिक बोलना, अधिक पैदल चलना अथवा वाहनों में घूमना, तैरना, अति उपवास, रात्रि जागरण, भय, शोक, चिंता, मल-मूत्र आदि वेगों को रोकना, पश्चिम दिशा से आनेवाली हवा का सेवन ।* *🔹हितकर : सर्वांग मालिश (विशेषतः सिर व पैर की), कान-नाक में तेल डालना, आराम, सुखशीलता, निश्चिंतता व शांत निद्रा ।* *🔹पित्त प्रकृति 🔹* *🔹त्याज्यः तेज धूप में घूमना, अग्नि के निकट रहना, रात्रि जागरण, अति परिश्रम, अति उपवास, क्रोध, शोक, भय ।* *🔹हितकर : शीत, सुगंधित द्रव्यों (जैसे चंदन, अगरु) का लेप, शीत तेलों से मालिश ।* *🔹कफ प्रकृति🔹* *🔹त्याज्य : दिन में शयन, आरामप्रियता, आलस्य ।* *🔹हितकर : घूमना-फिरना, दौड़ना, तैरना, व्यायाम, आसन, प्राणायाम ।* *( त्रिदोष सिद्धांत पृ.क्र. ४)* *🔹सुख-शांतिप्रदायक ईशान-स्थल🔹* *🔹सुख-शांति और कल्याण चाहनेवाले बुद्धिमानों को अपने घर, दुकान या कार्यालय में ईशान-स्थल पर अपने इष्टदेव, सदगुरु का श्रीचित्र लगा के वहाँ धूप-दीप, मंत्रोच्चार तथा साधना-ध्यान पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए । यह विशेष सुख-शांतिदायक है ।* *🔹ज्ञानार्जन में सहायता व सत्प्रेरणा हेतु🔹* *🔹विद्यार्थियों के लिए भी ईशान कोण बड़े महत्त्व का है । पूर्व एवं उत्तर दिशाएँ ज्ञानवर्धक दिशाएँ तथा ईशान-स्थल ज्ञानवर्धक स्थल है । जो विद्यार्थी ईशान-स्थल पर बैठ के पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पढ़ता है, उसे ज्ञानार्जन में विशेष सहायता मिलती है । पूर्व की ओर मुख करने से विशेष लाभ होता है । अध्ययन-कक्ष में सदगुरु या ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों के श्रीचित्र लगाने चाहिए, इससे सत्प्रेरणा मिलती है ।* *🌞🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🌞*

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