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जगन्नाथ मंदिर पुरी में स्थित एक प्रमुख हिंदू मंदिर है, जो भगवान विष्णु के एक रूप जगन्नाथ को समर्पित है। इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है और इसके निर्माण के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। *मंदिर के निर्माण की कथा* माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ की मूल मूर्ति एक अगरु वृक्ष के नीचे मिली थी, जो इतनी चकचौंध करने वाली थी कि धर्म ने इसे पृथ्वी के नीचे छुपाना चाहा। मालवा नरेश इंद्रद्युम्न को स्वप्न में यही मूर्ति दिखाई दी थी, जिसके बाद उन्होंने कड़ी तपस्या की और भगवान विष्णु ने उन्हें पुरी के समुद्र तट पर जाकर एक दारु (लकड़ी) का लठ्ठा मिलने का निर्देश दिया। राजा ने ऐसा ही किया और लकड़ी से मूर्ति का निर्माण कराया ¹। *मंदिर के निर्माण का समय* जगन्नाथ मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में पूर्वी गंगा राजवंश के शासक राजा अनंतवर्मन चोडगंगा देव ने करवाया था। मंदिर के जगमोहन और विमान भाग को इन्हीं के शासन काल में 1078-1148 के दौरान बनाया गया था। ओडिशा के राजा अनंग भीम ने 1174 ईस्वी में जगन्नाथ धाम मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था ² ¹। *मंदिर की कहानी* मंदिर की एक कथा के अनुसार, राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान जगन्नाथ की मूर्ति को ढूंढने के लिए एक ब्राह्मण विद्यापति को भेजा था। विद्यापति ने सबर कबीले के मुखिया की पुत्री से विवाह कर लिया और गुफा में जाकर मूर्ति चुरा ली। इसके बाद राजा ने भगवान जगन्नाथ की मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया ³। *मंदिर के बारे में अन्य तथ्य* - जगन्नाथ मंदिर की वास्तुकला कलिंग शैली में है। - मंदिर का मुख्य भवन 20 फीट ऊंची दीवार से घिरा है। - मंदिर के शिखर पर भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र बना हुआ है। - जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ के अलावा भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की मूर्तियां भी हैं।

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