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Rama Devi Sahu

408 days ago

🙏‼️ Hari Om Tat Sat ‼️🙏 Dt.18.07.2025 (Friday) ****************************** 🙏🌹 Suprabhat 🌹🙏 *********************** सनातन धर्म में जीवन के 4 प्रमुख भाग (आश्रम) किये गए हैं- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास। मनुष्य की आयु 100 वर्ष मानकर प्रत्येक आश्रम 25 वर्षों का होता है- 1.) ब्रह्मचर्य आश्रम (जन्म से 25 वर्ष तक)- शैक्षणिक उपलब्धियां एवं बौद्धिक विकास हेतु। 2.) गृहस्थ आश्रम (25 से 50 वर्ष तक)- सामाजिक विकास हेतु विवाह, संतानोत्पत्ति व धर्म, अर्थ, काम की प्राप्ति हेतु। 3.) वानप्रस्थ आश्रम (50 से 75 वर्ष तक)- आध्यात्मिक उत्कर्ष हेतु। 4.) सन्यास आश्रम (75 से 100 वर्ष तक)- मोक्ष प्राप्ति हेतु। उम्र के 5 साल तक बच्चा अपने माता-पिता के साथ रहता था और उसके बाद उसे गुरुकुल में भेज दिया जाता था। गुरुकुल में गुरू अपने शिष्यों को विविध विषयों-वस्तुओं का ज्ञान देते थे। मनुष्य का आचरण कैसा हो? आदि के बारे में बताते थे। इस आश्रम में विद्यार्थी अपना जीवन शिक्षा ग्रहण करने में व्यतीत करता है। ये सब चीज़े #ब्रह्मचर्य_आश्रम में आती हैं और ये मनुष्य के आयु के 25 वर्ष तक रहता था। फिर उसके बाद #गृहस्थाश्रम है जो कि 25 से 50 वर्ष तक रहता था। इसमें मनुष्य की शादी हो जाती है और मनुष्य का काम घर चलाने के लिए पैसे कमाना और घर के सारे व्यक्तियों का ध्यान रखना होता था। गृहस्थाश्रम में अर्थ, धर्म और काम ये प्रमुख ध्येय होते थे। जब घर की जिम्मेदारियां ख़त्म हो जाती हैं, तब मनुष्य धीरे-धीरे अपना मन सामाजिक कार्यों में लगाता है और इसे #वानप्रस्थाश्रम कहते हैं और ये मनुष्य के 50 से 75 वर्ष के आयु तक रहता था। #संन्यासाश्रम में मनुष्य अपना ध्यान घर से पूरी तरह हटाकर सामाजिक कार्य में लगा देता था। जब मनुष्य की आयु 75 वर्ष से ज्यादा हो जाती है तब इस आश्रम के अनुसार उसे जीवन व्यतीत करना होता है। इस आश्रम का उद्देश्य मोक्ष प्राप्ति का होता था। इस तरह मनुष्य का जीवन चार भागों में बाँटा गया था। किन्तु समय के साथ पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से सबकुछ बदल चुका है। *आज भी यदि मनुष्य 50 साल की उम्र के बाद अपनी जिम्मेदारियाँ बच्चों को सौंप कर उनको आत्मनिर्भर बना दे, भले ही उनके निर्णयों के पक्ष तथा विपक्ष के बारे में उन्हें बताये, उनका मार्गदर्शन करे; पर अपनी राय उन पर न थोपे तो गृहस्थी में रहते हुए भी सहज तरीके से वानप्रस्थाश्रम का सुख उठाया जा सकता है।* पर कड़वी सच्चाई है कि आज व्यक्ति अपने अधिकार किसी दूसरे को (भले ही वो उसका लड़का / लड़की ही क्यों न हो) नहीं देना चाहता है और ता-उम्र भौतिक सुख भोगना चाहता है। 🙏 हरिओम् तत्सत् 🙏

Comments (3)

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

Jul 18, 2025

HAR HAR MAHADEV MAA ADISHAKTI SHUBH RATRI VANDAN AVM SNEHAL SADAR NAMAN OM NAMH SHIVAY NAMASTUBHAYAM NAMO NAMH 🙏🙏🚩

Dr Anurag Prajapati

Dr Anurag Prajapati

Jul 18, 2025

राधे राधे दीदी

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

Jul 18, 2025

OM SERV MANGAL MANGELEY SHIVE SARVARTH SADHIKE SHRANY TRAMBAKE GAURI NARAYANI NAMOSTUTE NAMO NAMH JAI MATA SABHI MANOVANCHIT ABHILASHA PURN KARE HAR SANKAT NIRASHA SE DUR RAKHE 🙏🚩