
Rama Devi Sahu
42 days ago
जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ 16 जुलाई गुरुवार से है. श्री मंदिर से निकलने वाली रथ यात्रा गुंडिचा मंदिर जाती है और फिर वहां से श्री मंदिर आती है. भगवान जगन्नाथ जी बडे भाई बलभद्र और छोटी बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं. वहीं वे कुछ दिन विश्राम करते हैं, फिर वहां से वापस आते हैं. भगवान का नगर भ्रमण हर साल होता है. भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? इसके बारे में 2 कथाएं हैं. भगवान जगन्नाथ ने रानी गुंडिचा को बनाया अपनी मौसी ओडिशा के तत्कालीन राजा इंद्रद्युम्न ने श्रीमंदिर का निर्माण तो करा लिया था, लेकिन उसमें मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के लिए कोई योग्य पुरोहित नहीं मिल रहा था. तब एक दिन नारद जी ने राजा को बताया कि ब्रह्मा जी ही इस मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करा सकते हैं. राजा ब्रह्म लोक जाने को तैयार हो गए, लेकिन नारद जी ने कहा कि वहां से वापस आने पर कई युग बीत जाएंगे. इस पर रानी गुंडिचा ने समाधि लेकर तप करने का वचन दिया. राजा ब्रह्म लोक चले गए, जब वे ब्रह्मा जी के साथ वापस आए तो श्रीमंदिर रेत में दब गया था. कई युग बीत गया था. पुरी में गालु माधव नए राजा थे. राजा इंद्रद्युम्न ने गालु माधव को श्री मंदिर की पूरी सच्चाई बताई. खुदाई के बाद मंदिर का गर्भगृह खोजा गया, जहां पर मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा होनी थी. पुरी में है मौसी मां मंदिर पुरी में देवी अर्धशोषणी का मंदिर हैं, जिनको अर्धासिनी भी कहा जाता है. ये भी भगवान जगन्नाथ की मौसी कहलाती हैं. स्कंद पुराण की कथा के अनुसार, एक बार पुरी में समुद्र का जल स्तर काफी ऊंचा हो गया, जिससे बाढ़ आ गई और श्री मंदिर पर खतरा मंडराने लगा. तब देवी अर्धासिनी ने उस बाढ़ के आधे पानी को पी लिया, जिससे जगन्नाथ जी के श्री मंदिर पर आया संकट टल गया. इस वजह से ये पुरी की संरक्षक देवी हैं. एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार लक्ष्मी जी किसी वजह से नाराज होकर अपने मायके चली गईं. तब श्रीमंदिर में अन्न और ऐश्वर्य की कमी हो गई. ऐसी स्थिति में भगवान जगन्नाथ और बलभद्र जी को भोजन के लिए भिक्षा मांगनी पड़ी. वहीं उनकी छोटी बहन सुभद्रा अपनी मौसी देवी अर्धशोषणी के घर चली गईं. वहां पर देवी अर्धशोषणी ने सुभद्रा जी का विशेष ख्याल रखा और मां की तरह उनकी देखरेख की. रथ यात्रा के समय भगवान जगन्नाथ का रथ देवी अर्धशोषणी के मंदिर के सामने रुकता है. वहां पर मौसी अर्धशोषणी उनको पोड़ा पीठा का भोग लगाती हैं. #jagannath #JagannathRathYatra

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