MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

335 days ago

🚩 नवरात्र में "कन्या पूजन" का महात्म्य 🚩 🌺🌷🌺🌷🌺🌷🌺🌷🌺🌷🌺🌷 🌹 नवरात्रि की अष्टमी और नवमी के दिन किए जाने वाले कन्या पूजन को कंजक भी कहा जाता है। इस पावन दिन छोटी बच्चियों को देवी का स्वरूप मानते हुए पूजा की जाती है और उनसे सुख-समृद्धि एवं निरोगी होने का आशीर्वाद लिया जाता है। मान्यता है कि देवी स्वरूप इन नौ_कन्याओं के आशीर्वाद मां दुर्गा की कृपा लेकर आता है। ऐसे में नवरात्रि का व्रत रखने वाला हर साधक अष्टमी या नवमी के दिन कन्या का पूजन अवश्य करता है। कन्या पूजन यदि पूरे विधि-विधान से किया जाए तो माता_का_आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है, लेकिन कई बार जाने- अनजाने लोग इसमें कुछ गलतियां भी कर देते हैं। ऐसे में माता की कृपा साधक पर नहीं होती है। चूंकि कन्या पूजन के बिना नवरात्रि पूजा के फल की प्राप्ति नहीं होती है, इसलिए आइए जानते हैं कन्या पूजन की सही विधि....‼️ कन्याओं के उम्र का महत्व...‼️ दो वर्ष की कन्या का पूजन करने से घर से दरिद्रता खत्म होती है. तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति मानी जाती है. त्रिमूर्ति के पूजन से घर धन-धान्य से भरा होता है. एवं परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है. चार वर्ष की कन्या को कल्याणी माना जाता है. इनका पूजन करने से घर-परिवार का कल्याण होता है. पांच वर्ष की कन्या को रोहिणी माना जाता है. शास्त्रों में उल्लेखित है रोहिणी का पूजन करने से बीमारियां दूर होती हैं. छह साल की कन्या को कालिका माना गया है. कालिका रूप की पूजा-अर्चना करने से विद्या एवं राजयोग की प्राप्ति होती है. सात साल की कन्या चंडिका स्वरूप होती हैं. इनका पूजा करने से धन एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. आठ वर्ष की कन्याएं शांभवी कहलाती हैं. इनकी पूजा करने से किसी भी तरह के विवादों में विजयश्री प्राप्त होती है. नौ साल की कन्याएं दुर्गा स्वरूप होती हैं. इनकी पूजा करने से शत्रु पक्ष पराजित होता है. दस वर्ष की कन्याएं सुभद्रा स्वरूप होती हैं. सुभद्रा अपने भक्तों की हर मनोरथ पूरा करती हैं...!! कन्या पूजन विधि...‼️ 01. अष्टमी के दिन कन्या पूजन के लिए प्रात:काल स्नान-ध्यान कर भगवान गणेश और मां महागौरी की पूजा करें। 02. देवी स्वरुपा नौ कन्याओं को घर में सादर आमंत्रित करें और उन्हें ससम्मान आसन पर बिठाएं। 03. सर्व प्रथम शुद्ध जल से कन्या के पैर धोएं। ऐसा करने से व्यक्ति के पापों का शमन होता है। 04. पैर धोने के पश्चात् कन्याओं को तिलक लगाकर पंक्तिबद्ध बैठाएं। 05. कन्याओं के हाथ में रक्षासूत्र बांधें और उनके चरणों में पुष्प चढ़ाए। 06. इसके बाद नई थाली में कन्याओं को पूड़ी, हलवा, चना आदि श्रद्धा पूर्वक परोसें। 07. भोजन में कन्याओं को मिष्ठान और प्रसाद देकर अपनी क्षमता के अनुसार द्रव्य, वस्त्र आदि का दान करें। 08. कन्याओं के भोजन के उपरांत उन्हें देवी का स्वरूप मानते हुए उनकी आरती करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। 09. अंत में इन सभी कन्याओं को सादर पूर्वक दरवाजे तक और संभव हो तो उनके घर तक जाकर विदा करना न भूलें। 🌺 यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। 🙏🙏 🌺 यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला क्रिया:॥🙏🙏 🌺*!! जय माँ जगतजननी !!*🙏 🌺*!! जय माँ शेरावाली !!*🙏 🌺*!! जय माँ भवानी !!*🙏

Post media

Comments (2)

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 30, 2025

🙏🙏🙏🙏🙏

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 30, 2025

♥️♥️ इस पोस्ट को दिल से धन्यवाद् *_*जी बहन जी*_* बहुत ही अच्छी पोस्ट आपको भी कन्या पूजन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं जी।। ््््््ॐ