MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

145 days ago

विवाह : क्या आप जानते है ________________________ पुराणों, विशेषकर गरूड पुराण के अनुसार विवाह कोई संयोग या केवल इस जन्म का बंधन नहीं बल्कि पिछले जन्मों के कर्मो और ऋणानुबंध(लेन देन) पर आधारित एक प्रारब्ध (भाग्य) है। पुराणों मे विवाह और प्रारब्ध का संबंध :___________________ ऋणानुबंध(कर्मो का हिसाब) : विवाह को पुराने कर्मो का हिसाब चुकाने का माध्यम माना गया है, जिन लोगो के पिछले जन्म मे साथ प्रेम, विवाद या शत्रुता का भाव रहा हो वे इस जन्म में जीवन साथी के रूप मे जुड़ते हैं। पूर्व निरधारित : गरूड पुराण मे स्पष्ट उल्लेख है कि व्यक्ति का जन्म, मृत्यु, माता पिता और जीवनसाथी यह चार चीजें पहले से ही अटल रूप में तय होती हैं।।________ कर्म का फल : आत्मा अपने पिछले जन्म के अधूरे रिश्तो और अनुभव के आधार पर ही इस जन्म मे अपने साथी का चुनाव करती है। इसलिए जिससे आप की शादी होनी है अंतत: उसी से होती है।।________________________ कर्तव्य और मुक्ति : भले ही जीवनसाथी प्रारब्ध से मिलता हो, लेकिन उस रिश्ते को निभाना आप का कर्म है। हिन्दू धर्म मे शास्त्रों के अनुसार वैवाहिक और पारिवारिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना ही मोक्ष का मार्ग है।।

Comments (1)

Rohit  Patel

Rohit Patel

May 19, 2026

जी...✔️👌💕💕💕