
Rama Devi Sahu
301 days ago
🌹महर्षि दधीचि के पुत्र पिप्पलाद और शनिदेव के क्रोध की कहानी:🌹 👉पिप्पलाद का क्रोध और शनिदेव की प्रतिज्ञा👉 प्राचीन काल में, जब महर्षि दधीचि ने लोक कल्याण के लिए अपनी अस्थियों का दान कर दिया था, तब उनकी पत्नी सुवर्चा गर्भवती थीं। अपने पति के वियोग और कर्तव्य-परायणता से प्रेरित होकर, उन्होंने पीपल के वृक्ष के नीचे अपनी देह त्याग दी। उसी पीपल वृक्ष की छाया में एक तेजस्वी शिशु का जन्म हुआ, जिसका नाम 'पिप्पलाद' पड़ा। इस अनाथ शिशु का पालन-पोषण पीपल के पत्तों और उसी वृक्ष की दिव्य ऊर्जा से हुआ। पिप्पलाद बड़े होकर एक तेजस्वी और विद्वान ऋषि बने। उनका मन हमेशा अपने माता-पिता के त्याग और उनकी मृत्यु के रहस्य को जानने के लिए व्याकुल रहता था। एक दिन उन्हें ज्ञान हुआ कि उनके माता-पिता की अल्पायु मृत्यु का कारण शनिदेव की कुदृष्टि थी। शनिदेव के प्रभाव के कारण ही उनके माता-पिता को अल्पायु में देह त्यागनी पड़ी थी, और इसी कारण उन्हें जन्म लेते ही अनाथ होना पड़ा। यह जानकर पिप्पलाद का क्रोध सीमा से अधिक बढ़ गया। उन्होंने गहन तपस्या की और भगवान शिव से वरदान प्राप्त किया। वरदान में उन्हें ऐसी शक्ति मिली कि वे अपनी तपस्या के बल पर किसी को भी भस्म कर सकते थे। क्रोध से भरे पिप्पलाद ने अपने शरीर से 'ब्रह्मदंड' (ब्रह्मशक्ति से निर्मित एक दंड) प्रकट किया और शनिदेव को लक्ष्य करके उसका संधान किया। जैसे ही ब्रह्मदंड शनिदेव की ओर बढ़ा, त्रिलोकी में हाहाकार मच गया। शनिदेव ब्रह्मदंड की प्रचंड शक्ति से भयभीत हो गए और वे अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। वे तीनों लोकों में भटकते रहे, लेकिन ब्रह्मदंड उनका पीछा करता रहा। अंततः, शनिदेव ने अपनी रक्षा के लिए ब्रह्माजी और अन्य देवताओं से प्रार्थना की। देवताओं ने पिप्पलाद को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन उनका क्रोध शांत नहीं हुआ।

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Nov 22, 2025
Jai Jai Shani Dev 🙏 Shubha Shanivar ki Subha Kamanayen ke Sath Subha Dopahar Jii 🙏 Bhagwan ki Aasirbad Aap pr Sadeib Bani Rahe 🙏 Aap ka Din Subha Mangalmay Ho 🙏🌹🌹

