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वहाँ चमकती हुई मणि, दान का कलश, पवित्र ग्रंथ और कलम, सोने की भारी गदा, चमचमाता मुकुट, धनुष-बाण और तेज फरसा रखा था। तभी गुफा में गूंजती हुई आवाज सुनाई दी, "हे बालक! ये केवल वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि धरा पर मौजूद अमर चिरंजीवियों के दिव्य प्रतीक हैं।" आवाज ने समझाया, "अश्वत्थामा की मणि आत्मबल का, राजा बली का कलश असीम दानवीरता का, महर्षि व्यास का ग्रंथ ज्ञान का और हनुमान जी की गदा अटूट भक्ति का संदेश देती है। विभीषण का मुकुट अधर्म के खिलाफ धर्म चुनने की सीख देता है, तो कृपाचार्य और परशुराम के अस्त्र न्याय की रक्षा के प्रतीक हैं।" देवराज समझ गया कि अमरता केवल शरीर की नहीं होती। जब तक संसार में ज्ञान, भक्ति, दान और न्याय के ये दिव्य गुण जीवित रहेंगे, तब तक श्रेष्ठ विचार हमेशा अमर रहेंगे।

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