
Rama Devi Sahu
369 days ago
जरूरत के हिसाब से व्यक्ति ,समय और परिस्थितयां बदलती रहती है लेकिन जब से होश संभाला है तब से देखता आ रहा हूं एक बिहारी ही है जो अमेरिका में हो या यूरोप में या दुनिया के किसी कोने में एक रूप रहता है शायद ये #छठ ही है जो हमे अपना किरदार और परिचय भूलने नहीं देता है।दीपावली के गुजरते ही अपनी मिट्टी ,गांव, छठ घाट बाला पोखर,ठेकुआ और #शारदासिन्हा जी के गाने #AI के युग में भी हम यथावत रखना पसंद करेंगे ।आज कुछ लोग अपने छत पर भगवान भास्कर को और छठी मैया की व्यक्तिगत आराधना करेंगे वो शायद भूल रहे है कि छठ सामुदायिक है , प्रकृति से ,समाज से जुड़ने का पर्व है। भगवान भास्कर एवं छठी मइया की कृपा सभी पर सदा बना रहे। जय छठी मैया 🙏🏻

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