
Rama Devi Sahu
23 days ago
*श्री कृष्ण का राधा रूप* एक बार बरसाने में राधा रानी मान कर बैठीं। कृष्ण ने बहुत मनाया, पर राधा जी नहीं मानीं। तब सखियों ने कहा - "कान्हा, आज राधा ही नहीं मानेगी।" कृष्ण मुस्कुराए और बोले - "अगर राधा नहीं आएगी, तो कृष्ण ही राधा बन जाएगा।" और फिर श्यामसुंदर ने राधा रानी की साड़ी पहनी, वही सफ़ेद वस्त्र जिसमें सोने का गोटा लगा हो, मोतियों की माला, कमरबंद, पायल... मोर-मुकुट के ऊपर राधा जी जैसा घूँघट सा आँचल लिया। जब वो नाचते-नाचते राधा रानी के महल में पहुँचे, तो सखियाँ भी धोखा खा गईं। उन्हें लगा राधा आ गई। राधा रानी ने देखा - अरे, ये तो मेरा कान्हा ही राधा बना है! उनका सारा मान टूट गया, वो हँस पड़ीं और बोलीं - "कान्हा, तुम राधा बनो तो सारी सृष्टि झुक जाए।" कृष्ण ने कहा - "राधे, मैं और तुम अलग कहाँ हैं? मैं ही तुम हूँ, तुम ही मैं हो।" *इसीलिए कहते हैं - राधा की चाहत हैं कृष्ण, और कृष्ण का विश्वास हैं राधा।* जो इस रूप का दर्शन करता है, उसके हृदय में कभी अहंकार नहीं रहता, केवल प्रेम रहता है। राधा-कृष्ण एक ही तो हैं, बस प्रेम ने दो नाम रख दिए।* जय हो लाड़ली लाल की
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