
Rama Devi Sahu
288 days ago
जब प्रभु ने पूछा: "क्या तुम संतुष्ट हो ?" 🌸 एक दिन की बात है — एक साधारण सी भक्ति करने वाली स्त्री, जिसे सब “मीरा” कहते थे, अपने प्रभु का नाम जपते-जपते थक चुकी थी। रात बीत जाती, सुबह हो जाती — पर उसका मन बस एक ही पुकार में डूबा रहता — “श्याम, बस एक बार दर्शन दे दो…” वर्षों की साधना, आँसुओं की धार और अनगिनत रातों की तड़प के बाद एक दिन वह बंसी की ध्वनि सुनकर चौंक उठी। सामने वही नीलवर्ण मोहक रूप — मोरपंख, कन्हैया, मुस्कुराते हुए खड़े थे। उन्होंने मधुर स्वर में पूछा — > “मीरा, क्या तुम संतुष्ट हो?” उस क्षण समय ठहर गया… उसकी आँखों से आँसू बहे, होंठ काँपे — पर मन में एक गहरी शांति उतर आई। वह बोली — > “प्रभु, अब कोई अभिलाषा शेष नहीं। आपके सामने आना ही मेरे जीवन की सबसे बड़ी संतुष्टि है। अब मैं कह सकती हूँ — हाँ प्रभु, मैं संतुष्ट हूँ।” श्याम मुस्कुराए, उनकी दृष्टि में प्रेम, वात्सल्य और अनंत करुणा थी। उन्होंने कहा — > “यही तो सच्चा उत्तर है, मीरा। जब खोज समाप्त होकर भक्ति शरण बन जाए — तब आत्मा तृप्त हो जाती है।” और वह क्षण — मीरा के लिए मोक्ष बन गया। अब न तृष्णा रही, न विरह — सिर्फ़ एक नाम, एक प्रेम, एक पूर्णता — श्याम। 💫 मीरा ने कहा —😥 “प्रभु, अब मैं नहीं, सिर्फ़ तुम हो...” और उसी क्षण से उसका नाम ‘मीरा’ नहीं रहा — वो बन गई कृष्णमयी। 💖 💞 संतुष्टि तब नहीं मिलती जब संसार हमारी इच्छा पूरी करता है, बल्कि तब मिलती है जब आत्मा अपने प्रभु से मिलन का अनुभव करती है। राधे राधे सखियों 🌸

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Nov 15, 2025
Jai Shree Shyam 🙏🌹🌹

Rakesh Kumar
Nov 15, 2025
jai shree shyam 🙏
