
Rohit Patel
348 days ago
गीधकृत-श्रीरामस्तुति ॥गीधकृत-श्रीरामस्तुति॥ जय राम रूप अनूप निर्गुन सगुन गुन प्रेरक सही। दससीस बाहु प्रचंड खंडन चंड सर मंडन मही॥ पाथोद गात सरोज मुख राजीव आयत लोचनं। नित नौमि रामु कृपाल बाहु बिसाल भव भय मोचनं॥१॥ हे रामजी! आपकी जय हो। आपका रूप अनुपम है, आप निर्गुण हैं, सगुण हैं और सत्य ही गुणों के (माया के) प्रेरक हैं। दस सिर वाले रावणकी प्रचण्ड भुजाओंको खंड-खंड करनेके लिए प्रचण्ड बाण धारण करनेवाले, पृथ्वीको सुशोभित करनेवाले, जलयुक्त मेघके समान श्याम शरीरवाले, कमलके समान मुख और (लाल) कमलके समान विशाल नेत्रोंवाले, विशाल भुजाओंवाले और भव-भयसे छुड़ानेवाले कृपालु श्रीरामजीको मैं नित्य नमस्कार करता हूँ॥१॥ बलमप्रमेयमनादिमजमब्यक्तमेकमगोचरं। गोबिंद गोपर द्वंद्वहर बिग्यानघन धरनीधरं॥ जे राम मंत्र जपंत संत अनंत जन मन रंजनं। नित नौमि राम अकाम प्रिय कामादि खल दल गंजनं॥२॥ आप अपरिमित बलवाले हैं, अनादि, अजन्मा, अव्यक्त (निराकार), एक अगोचर (अलक्ष्य), गोविंद (वेद वाक्यों द्वारा जानने योग्य), इंद्रियोंसे अतीत, (जन्म-मरण, सुख-दुःख, हर्ष-शोकादि) द्वंद्वोंको हरनेवाले, विज्ञानकी घनमूर्ति और पृथ्वीके आधार हैं तथा जो संत राम मंत्रको जपते हैं, उन अनन्त सेवकोंके मनको आनंद देनेवाले हैं। उन निष्कामप्रिय (निष्कामजनोंके प्रेमी अथवा उन्हें प्रिय) तथा काम आदि दुष्टों (दुष्ट वृत्तियों) के दलका दलन करनेवाले श्रीरामजीको मैं नित्य नमस्कार करता हूँ॥२॥ जेहि श्रुति निरंजन ब्रह्म ब्यापक बिरज अज कहि गावहीं। करि ध्यान ग्यान बिराग जोग अनेक मुनि जेहि पावहीं॥ सो प्रगट करुना कंद सोभा बृंद अग जग मोहई। मम हृदय पंकज भृंग अंग अनंग बहु छबि सोहई॥३॥ जिनको श्रुतियाँ निरंजन (मायासे परे), ब्रह्म, व्यापक, निर्विकार और जन्मरहित कहकर गान करती हैं। मुनि जिन्हें ध्यान, ज्ञान, वैराग्य और योग आदि अनेक साधन करके पाते हैं। वे ही करुणाकन्द, शोभाके समूह (स्वयं श्री भगवान्) प्रकट होकर जड़-चेतन समस्त जगत्को मोहित कर रहे हैं। मेरे हृदय कमलके भ्रमररूप उनके अंग-अंगमें बहुतसे कामदेवों की छवि शोभा पा रही है॥३॥ जो अगम सुगम सुभाव निर्मल असम सम सीतल सदा। पस्यंति जं जोगी जतन करि करत मन गो बस सदा॥ सो राम रमा निवास संतत दास बस त्रिभुवन धनी। मम उर बसउ सो समन संसृति जासु कीरति पावनी॥४॥ जो अगम और सुगम हैं, निर्मल स्वभाव हैं, विषम और सम हैं और सदा शीतल (शांत) हैं। मन और इंद्रियोंको सदा वशमें करते हुए योगी बहुत साधन करनेपर जिन्हें देख पाते हैं। वे तीनों लोकोंके स्वामी, रमानिवास श्रीरामजी निरंतर अपने दासोंके वशमें रहते हैं। वे ही मेरे हृदयमें निवास करें, जिनकी पवित्र कीर्ति आवागमन को मिटाने वाली है॥४॥ अबिरल भगति मागि बर गीध गयउ हरिधाम। तेहि की क्रिया जथोचित निज कर कीन्ही राम॥ अखंड भक्तिका वर माँगकर गृध्रराज जटायु श्री हरिके परमधामको चला गया। श्री रामचंद्रजीने उसकी (दाहकर्म आदि सारी) क्रियाएँ यथायोग्य अपने हाथोंसे की। 🙏जय श्रीराम 🌹🚩 🚩🪔🌺🌸🍰🍬🙏💞💞💞

Comments (8)

Rohit Patel
Sep 16, 2025
जी सौम्या बहन जी जय श्री राम जय सियाराम जय वीर हनुमान जी 🚩🪔🌺🍬📿🙏 सब का कल्याण हो यही मंगल कामना के साथ शुभ रात्रि विश्राम जी 🛏️💞💞💞💞 धन्यवाद जी 🌹🌹🤝🤗 निष्काम भाव से भेट कर रहे है जी 💞

Rama Devi Sahu
Sep 16, 2025
Jai Siyaram Ji 🙏 Sabhi ke liye Shri Ram Stuti Bahut Uttam hai 👌👌🙏🚩🚩🥀🥀🚩🚩 Dhanyawad Jii 🙏🌹🌹🥀🥀🙏🚩🥀

Rama Devi Sahu
Sep 16, 2025
Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏 Jai Bajrangbali Hanuman 🙏 Subha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Saumya Sharma
Sep 16, 2025
श्री राम स्तुति की बहुत बहुत ही सुन्दर पोस्ट के लिए धन्यवाद भाई जी 🙏🌹☺️ राम जी की कृपा आपके ऊपर सदैव ही बनी रहे 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
Sep 16, 2025
जय श्री राम 🙏 🌹 🙏 जय बजरंगबली 🙏आपको सितंबर माह के तीसरे मंगलवार और पितृ पक्ष दशमी श्राद्ध की हार्दिक शुभकामनाएं भैया जी 🙏 ठाकुर जी की कृपा से आप को उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशियां प्राप्त हों 🙏🌹🙂 राम भक्त हनुमान जी के साथ से आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो इसी शुभकामना के साथ शुभ रात्रि विश्राम 🙏🌹🙂

Rohit Patel
Sep 16, 2025
जी भाई जी 🌹🙂🙏

Radhe Radhe
Sep 16, 2025
🙏🙏 जय श्री राम, श्री राम जय राम जय जय राम।।🙏🙏
