
Rama Devi Sahu
340 days ago
. #नवरात्रि_का_तीसरा_दिन_माता_का_तीसरा_स्वरूप “माँ चन्द्रघण्टा” माँ चन्द्रघण्टा भक्तों की भय पीड़ा व दुःखों को मिटाने वाली हैं। भक्त जनों के मनोरथ को पूर्ण करने वाली हैं। देवी के इस रूप की उत्पत्ति नवरात्रि के तीसरे दिन होती है। यह रूप सभी प्रकार की अनूठी वस्तुओं को देने वाला तथा कई प्रकार की विचित्र दिव्य ध्वनियों को प्रसारित व नियन्त्रित करने वाला होता है। इनकी कृपा से व्यक्ति की घ्रांण शक्ति और दिव्य होती है। वह कई तरह की खुशबुओं का एक साथ आनन्द लेने में सक्ष्म हो जाता है। माँ दैत्यों का वध करके देव, दनुज, मनुजों के हितों की रक्षा करने वाली है। जिनके घण्टा में आह्ललादकारी चन्द्रमा स्थिति हो उन्हें चन्द्रघण्टा कहा जाता है। अर्थात् जिनके माथे पर अर्द्ध चन्द्र शोभित हो रहा है। जिनकी कांति सुवर्ण रंग की है ऐसी नव दुर्गा के इस तृतीय प्रतिमा को चन्द्रघण्टा के नाम से ख्याति प्राप्त हुई हैं। यह दैत्यों का संहार भयानक घण्टे की नाद से करती हैं। यह माता दस भुजा धारी हैं। जिनके दाहिने हाथ में ऊपर से पद्म, वाण, धनुष, माला आदि शोभित हो रहे हैं। जिनके बायं हाथ में त्रिशूल, गदा, तलवार, कमण्डल तथा युद्ध की मुद्रा शोभित हो रही है। माता सिंह में सवार होकर जगत के कल्याण हेतु दुष्ट दैत्यों को मारती हैं। माँ का यह रूप शत्रुओं को मारने हेतु सदैव तत्पर रहता है। माँ चन्द्रघण्टा की कथा माँ चन्द्रघण्टा असुरों के विनाश हेतु माँ दुर्गा के तृतीय रूप में अवतरित होती हैं। जो भयंकर दैत्य सेनाओं का संहार करके देवताओं को उनका भाग दिलाती हैं। भक्तों को वांछित फल दिलाने वाली हैं। आप सम्पूर्ण जगत की पीड़ा का नाश करने वाली हैं। जिससे समस्त शात्रों का ज्ञान होता है, वह मेधा शक्ति आप ही हैं। दुर्गा भव सागर से उतारने वाली भी आप ही है। आपका मुख मंद मुस्कान से सुशोभित, निर्मल, पूर्ण चन्द्रमा के बिम्ब का अनुकरण करने वाला और उत्तम सुवर्ण की मनोहर कान्ति से कमनीय है, तो भी उसे देखकर महिषासुर को क्रोध हुआ और सहसा उसने उस पर प्रहार कर दिया, यह बड़े आश्चर्य की बात है कि जब देवी का वही मुख क्रोध से युक्त होने पर उदयकाल के चन्द्रमा की भांति लाल और तनी हुई भौहों के कारण विकराल हो उठा, तब उसे देखकर जो महिषासुर के प्राण तुरंत निकल गये, यह उससे भी बढ़कर आश्चर्य की बात है, क्योंकि क्रोध में भरे हुए यमराज को देखकर भला कौन जीवित रह सकता है। देवि! आप प्रसन्न हों। परमात्मस्वरूपा आपके प्रसन्न होने पर जगत् का अभ्युदय होता है और क्रोध में भर जाने पर आप तत्काल ही कितने कुलों का सर्वनाश कर डालती हैं, यह बात अभी अनुभव में आयी है, क्योंकि महिषासुर की यह विशाल सेना क्षण भर में आपके कोप से नष्ट हो गयी है। कहते है कि देवी चन्द्रघण्टा ने राक्षस समूहों का संहार करने के लिए जैसे ही धनुष की टंकार को धरा व गगन में गुजा दिया वैसे ही माँ के वाहन सिंह ने भी दहाड़ना आरम्भ कर दिया और माता फिर घण्टे के शब्द से उस ध्वनि को और बढ़ा दिया, जिससे धनुष की टंकार, सिंह की दहाड़ और घण्टे की ध्वनि से सम्पूर्ण दिशाएं गूँज उठी। उस भयंकर शब्द व अपने प्रताप से वह दैत्य समूहों का संहार कर विजय हुई। मंत्र पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यां चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥ ० ० ० ॥ॐ श्रीदुर्गायै नमः॥ ********************************************

Comments (3)

Radhe Radhe
Sep 24, 2025
🕉️🌹जय ,मां चंद्रघंटा🌹🕉️ 🙏"मां" चंद्रघंटा _का मंत्र-🙏 *या देवी _सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै_ नमस्तस्यै" नमो' नमः। *मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग*: *हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा को खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग, अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा पंचामृत, चीनी व मिश्री भी अर्पित कर सकते हैं।🍃 जय माता दी!! आप और आपके परिवार पर माता रानी अपनी कृपा दृष्टि सदैव बनाए रखें//जय माताजी आपका दिन शुभ हो धन्यवाद,👌*_*जी बहन जी*_* 👌 अति सुंदर "लाइन कोट्स स्टोरी" पोस्ट जी ््््््ॐ 👌 ््््््ॐ 🌹🕉️

Radhe Radhe
Sep 24, 2025
🌷🌷 जय माता दी ,माता रानी की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।।शारदीय नवरात्रि पर्व , मां दुर्गा माता का तीसरा स्वरूप==जय मां चंद्रघंटा माता=। जी की,*अपार। कृपा दृष्टि सदैव आप और आपके पूरे परिवार पर बनी रहे। जय माता दी प्रेम से बोलो जय माता दी सारे बोलो जय माता दी ््््््ॐ माता रानी की सदा ही जय हो।। आपकी हर मनोकामना पूरी हो।। शुभ नवरात्रि की शुभकामनाएं !!____जी बहन जी____!!!🌷 🌷
