
shree Rana
138 days ago
*धामा वाली माँ शक्ति की कथा* --- *दोहा* झालावाड़ की भूमि पर, धामा गढ़ सरताज। हरपालदेव नरेश थे, शक्ति रानी को साज॥1॥ रूप रानी का जगत में, साक्षात जगदंब। जाने राजा हरपाल सब, माँ का यही कदंब॥2॥ परणे दिन माँ ने कहा, सुन लो वचन नरेश। प्रकट रूप जब देखिहो, जाऊँ निज धाम देश॥3॥ झरूखे बैठी माँ तहाँ, नीचे बालक चार। तीन कुँवर संग चारण सुत, खेले हँस-हँस प्यार॥4॥ इतने में गज मतवाला, तोड़ चला दरबार। दौड़ा बालक ओर को, मच्यो हाहाकार॥5॥ माँ ने लांबो हाथ को, झरूखे से पसार। चारण सुत को ताली दे, दीन्हो दूर किवार॥6॥ तीन कुँवर निज नंद को, लीन्हा हाथ उठाय। पलक झपकते माँ तहाँ, झरूखे लीन्हा लाय॥7॥ देखा लोग चकित भये, बोले जयकार। प्रकटी माँ जगदंबिका, धन्य-धन्य अवतार॥8॥ वचन याद माँ को हुआ, चाली गढ़ की ओर। नैनन नीर भराय के, राजा चले विभोर॥9॥ उमादे लाड़ली तहाँ, दौड़ी माँ के पास। "मुझको भी संग ले चलो", बोली भर निश्वास॥10॥ गोदी बैठाय लाड़ली, धरती पर माँ बैठ। धीरे-धीरे मेदिनी, लीन्ही माँ समेट॥11॥ चैतर वद तेरस दिवस, माँ लीन्हो निज धाम। धामा धरती पूजती, जपे शक्ति का नाम॥12॥ जहाँ समाई जगदंबिका, दीप जले दिन-रात। दर्शन से दुखड़ा मिटे, पूरण होवे बात॥13॥ धन्य धामा की भूमि यह, धन्य शक्ति अवतार। जो गावे यह दोहला, मिटे सकल विकार॥14॥ *बोलो माँ शक्ति की जय। धामा वाली माँ की जय।* ---

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