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कर ले निज काज जवानी में दो दिन की जिन्दगानी में बडे भाग्य से नर तन पाया है सौभाग्य जवानी आई है हे मूढ इसे ना खो देना किस्से और कहानी में कर ले निज काज जवानी में दो दिन की जिन्दगानी में बिसियो में नाहक भूल रहा अपनी बुद्धि और तन पर फूल रहा मिट्ठी की काया बिनसेगी पीसा जाये यम दानी में कर ले निज काज जवानी में दो दिन की जिन्दगानी में

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