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Rama Devi Sahu

132 days ago

यह कथा शिव पुराण के विद्येश्वर संहिता और अन्य पुराणों से प्रेरित है। यह दर्शाती है कि भगवान शिव और विष्णु के बीच कोई भेद नहीं है। प्रसंग: भगवान विष्णु ने एक बार अत्यंत मनमोहक 'किशोर रूप' धारण किया। कारण: शिव जी के मन में अपने आराध्य (विष्णु जी) के उस सुंदर रूप को हर दिशा से निहारने की तीव्र इच्छा जगी। परिणाम: चूँकि ब्रह्मा जी के चार मुख थे और इंद्र की हजार आँखें थीं, वे उस रूप का अधिक आनंद ले रहे थे। शिव जी की इसी अनन्य भक्ति ने उन्हें एक मुख से 'पंचमुखी' बना दिया। एक समय की बात है, वैकुंठ के स्वामी भगवान श्री हरि विष्णु ने एक अत्यंत दिव्य और चित्त को हर लेने वाला 'किशोर रूप' धारण किया। उनके इस रूप की आभा इतनी अलौकिक थी कि समस्त देवलोक उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ा। ब्रह्मा जी अपने चार मुखों से उन्हें देख रहे थे, शेषनाग अपने अनेक फणों से उस छवि को निहार रहे थे और देवराज इंद्र अपनी सहस्त्र (हजार) आंखों से उस दिव्यता का पान कर रहे थे। वहाँ महादेव भी उपस्थित थे। जब उन्होंने विष्णु जी के उस अनुपम सौंदर्य को देखा, तो उनके मन में एक अनूठा भाव जागा। उन्होंने सोचा, "मेरे पास तो केवल दो नेत्र और एक ही मुख है। मैं अपने प्रभु के इस मनोहर रूप को पूरी तरह कैसे देख पाऊं? काश! मेरे भी कई मुख होते ताकि मैं हर दिशा से इस सुंदरता को एक साथ निहार सकता।" जैसे ही महादेव के मन में अपने आराध्य के प्रति यह शुद्ध प्रेम और इच्छा उत्पन्न हुई, तत्काल उनके एक मुख से पांच दिव्य मुख प्रकट हो गए और प्रत्येक मुख में तीन-तीन नेत्र सुशोभित हो उठे। इस प्रकार महादेव 'पंचानन' कहलाए। शिवपुराण के अनुसार, ये पांच मुख केवल दिशाओं के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये ब्रह्मांड के पांच प्रमुख कार्यों और तत्वों के स्वामी हैं: सद्योजात (पश्चिम मुख): यह श्वेत वर्ण का है। यह मन की शुद्धता और 'सृष्टि' का प्रतीक है। वामदेव (उत्तर मुख): यह कृष्ण वर्ण का है। यह अहंकार का शुद्धिकरण और 'स्थिति' का प्रतीक है। अघोर (दक्षिण मुख): यह नील/काला वर्ण है। यह बुद्धि और 'संहार' का प्रतीक है, जो बुराई का अंत करता है। तत्पुरुष (पूर्व मुख): यह पीत (पीला) वर्ण है। यह आत्मा और 'तिरोभाव' का प्रतीक है। इसी मुख से गायत्री मंत्र का प्राकट्य माना जाता है। ईशान (ऊर्ध्व मुख): यह स्फटिक के समान चमकता हुआ मुख है। यह आकाश तत्व और 'अनुग्रह' का प्रतीक है। भगवान शिव का पंचानन स्वरूप हमें सिखाता है कि भक्ति में ही शक्ति है। जब भक्त के मन में ईश्वर को देखने की सच्ची तड़प होती है, तो स्वयं महादेव उसे अनंत दृष्टियाँ प्रदान करते हैं। जो मनुष्य शिव के इन पांच रूपों का ध्यान करता है, उसके पांचों तत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) संतुलित हो जाते हैं और उसे परम शांति प्राप्त होती है। ।। ॐ नमः शिवाय ।।

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Comments (8)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Apr 20, 2026

ॐ त्रवक्म यजा महि सुगन्धित पुष्टि वर्धनम उरवा रुक्मेव वन्दनाथ मृत्यु मोक्षी ममत्रम: 🕉️ ॐ नमः शिवाय 🕉️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Apr 20, 2026

ॐ त्रवक्म यजा महि सुगन्धित पुष्टि वर्धनम उरवा रुक्मेव वन्दनाथ मृत्यु मोक्षी ममत्रम: 🕉️ ॐ नमः शिवाय 🕉️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Apr 20, 2026

ॐ त्रवक्म यजा महि सुगन्धित पुष्टि वर्धनम उरवा रुक्मेव वन्दनाथ मृत्यु मोक्षी ममत्रम: 🕉️ ॐ नमः शिवाय 🕉️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Apr 20, 2026

ॐ त्रवक्म यजा महि सुगन्धित पुष्टि वर्धनम उरवा रुक्मेव वन्दनाथ मृत्यु मोक्षी ममत्रम: 🕉️ ॐ नमः शिवाय 🕉️

Radhe  🌹

Radhe 🌹

Apr 20, 2026

Har Har Mahadev 🙏🌷 Good Morning Ji 🙏

प्रेम कुमार

प्रेम कुमार

Apr 20, 2026

🌹हर हर महादेव 🌹 शुभ प्रभात वंदन बहना

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Apr 20, 2026

जय भोलेनाथ जी की🙏

Sanjay  Ahlawat

Sanjay Ahlawat

Apr 20, 2026

ओम नमः शिवाय हर हर महादेव 🔱 सुप्रभात आपका दिन मंगलमय हो