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Rama Devi Sahu

60 days ago

यह चित्र वास्तव में श्री कृष्ण और देवी रुक्मिणी के विवाह प्रसंग (रुक्मिणी विवाह) को दर्शाता है। धार्मिक मान्यताओं में रुक्मिणी माता को साक्षात् देवी लक्ष्मी का अवतार माना गया है, इसलिए इस दृश्य को 'लक्ष्मी नारायण विवाह' के रूप में भी देखा जा सकता है।इस पेंटिंग की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:पात्र: चित्र में नीली त्वचा वाले भगवान श्री कृष्ण पीछे की ओर खड़े हैं और उनके हाथों में विवाह की वरमाला छिपी हुई है। उनके सामने लाल वस्त्रों और गहनों से सुसज्जित देवी रुक्मिणी खड़ी हैं, जो आरती की थाली लिए हुए हैं।गणेश जी की उपस्थिति: प्रवेश द्वार पर छोटे बालक के रूप में भगवान गणेश दिखाई दे रहे हैं, जो हिंदू विवाह की परंपरा के अनुसार शुभता का प्रतीक हैं।पृष्ठभूमि: यह दृश्य संभवतः उस समय का है जब रुक्मिणी जी मंदिर में पूजा के लिए आती हैं और कृष्ण उनका हरण करने से ठीक पहले वहां पहुंचते हैं (रुक्मिणी हरण लीला)।

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