
प्रशांत कुमार मिश्रा
4 days ago
रामचरित: उत्तरकाण्ड ४०. नारदादि सनकादि मुनीसा | दरसन लागि कोसलाधीसा || दिन प्रति सकल अजोध्या आवहिं | देखि नगरु बिरागु बिसरावहिं || अर्थात् तुलसीदासजी कहते हैं कि सनक , सनन्दन , सनातन , सनत्कुमार और नारद आदि सभी मुनिश्वर कोशलराज श्रीरामजी के दर्शन के लिए प्रतिदिन अयोध्या आते हैं और उस दिव्य अयोध्या नगरी को देखकर वशीभूत हो जाते हैं , अपना वैराग्य भुला देते हैं | तात्पर्य यह है कि सनकादि और नारदादि मुनिश्वर जैसे अपना वैराग्य भुलाकर प्रभु श्रीरामजी और उनकी अयोध्या नगरी का दर्शन करके वशीभूत हो जाते हैं वही प्रेम हमारे भी मन में हो जाय कि हम भी अपना सर्वस्व भुलाकर प्रभु के वशीभूत हो जायॅं | जय जय सीताराम |
Comments (1)

Rama Devi Sahu
Sep 2, 2026
🙏🏹 Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🏹🙏
