
बद्रीप्रसादअसाटी
335 days ago
काम, क्रोध, मद, लोभ, सब, नाथ नरक के पंथ। सब परिहरि रघुबीरहि, भजहुँ भजहिं जेहि संत।

Comments (1)

बद्रीप्रसादअसाटी
Nov 9, 2025
जय जय श्री राम जी गाते हनुमान जी

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335 days ago
काम, क्रोध, मद, लोभ, सब, नाथ नरक के पंथ। सब परिहरि रघुबीरहि, भजहुँ भजहिं जेहि संत।


बद्रीप्रसादअसाटी
Nov 9, 2025
जय जय श्री राम जी गाते हनुमान जी