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काम, क्रोध, मद, लोभ, सब, नाथ नरक के पंथ। सब परिहरि रघुबीरहि, भजहुँ भजहिं जेहि संत।

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बद्रीप्रसादअसाटी

बद्रीप्रसादअसाटी

Nov 9, 2025

जय जय श्री राम जी गाते हनुमान जी