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Rama Devi Sahu

229 days ago

पौष मास में जब सूर्यदेव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस दिन मकर संक्राति का त्यौहार मनाया जाता है। उत्तरायण शुरू होने के साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है, इस दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। मकर संक्रांति से ही ऋतु में परिवर्तन होने लगता है, शरद ऋतु क्षीण होने लगती है और बसंत का आगमन शुरू हो जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। चूंकि शनि मकर व कुंभ राशि के स्वामी है। इसलिए यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं, सूर्य का उत्तरायण होना बेहद शुभ माना जाता है। पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान करने पर सभी कष्टों का निवारण होता है, इसीलिए इस दिन तीर्थ या गंगा में स्नान और दान करने की प्राचीन परंपरा है। 14 जनवरी 2026, बुधवार को सूर्यदेव दोपहर 3 बजकर 13 मिनट के आसपास मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

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