MyMandirInstall

*स्वदेशी आंदोलन - आत्मनिर्भरता से जागा राष्ट्रीय स्वाभिमान* > भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध से उभरा स्वदेशी आंदोलन, केवल विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तक सीमित नहीं था. यह भारतीयों में आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना जगाने वाला व्यापक जनआंदोलन बन गया. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय और अरविंद घोष जैसे नेताओं ने स्वदेशी के विचार को जन-जन तक पहुँचाया. इस आंदोलन ने विद्यार्थियों, महिलाओं, व्यापारियों, श्रमिकों और सामान्य नागरिकों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ा. स्वदेशी की वह चेतना आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक महत्वपूर्ण आधारशिला बनी और आज भी आत्मनिर्भरता तथा राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रेरणा देती है. *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!