
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
199 days ago
व्रज – फाल्गुन कृष्ण एकादशी Friday, 13 February 2026 ताजबीबी की भावपूर्ण अंतिम धमार फाल्गुन कृष्ण ११ से मुकुट के श्रृंगार प्रारंभ। बहोरि डफ बाजन लागे, हेली।। ध्रुव.।। खेलत मोहन साँवरो,हो, केहिं मिस देंखन जाय।। सास ननद बैरिन भइ अब, कीजे कोन उपाय।। १।। ओजत गागर ढारीये, यमुना जल के काज,।। यह मिस बाहिर निकसकें हम, जायें मिलें तजि लाज।।२।। आओ बछरा मेलियें, बनकों देहिं विडार।। वे दे हें, हम ही पठे हम, रहेंगी घरी द्वे चार।। ३।। हा हा री हों जातहों मोपें, नाहिन परत रह्यो।। तू तो सोचत हीं रही तें, मान्यों न मेरो कह्यो।। ४।। राग रंग गहगड मच्यो, नंदराय दरबार।। गाय खेल हंस लिजिये, फाग बडो त्योहार।। ५।। तिनमें मोहन अति बने, नाचत सबे ग्वाल।। बाजे बहुविध बाजहि रंज, मुरज डफ ताल।। ६।। मुरली मुकुट बिराजही, कटिपट बाँधे पीत।। इस पंक्ति को गाते गाते अकबर बादशाहकी बेगम ताजबीबी को अत्यंत विरह हुआ और अपना देह त्याग श्रीजीकी लीला में प्रविष्ट हुई, उनके ये पदकी अंतिम पंक्ति श्रीनाथजी ने पूर्ण की नृत्यत आवत *ताज* के प्रभु गावत होरी गीत।।७।। 🌸 *ताजबीबी की अंतिम धमार- होरि डफ... पद का भावार्थ हमने गुर्जर भाषा में किया था, मगर वैष्णवों की मांग अनुसार, अनुवाद- सुधाबहन भाटिया ने हिंदी भाषामें करके बडी कृपा कि है- इसलिए हम पुन: पोस्ट करते है! *🌻बहोरि डफ, बाजन लागे, हेली।। 🌻 ध्रुव.।। राग- नट 🍀खेलत मोहन साँवरो,हो, केहिं मिस देंखन जाय।। सास ननद बैरिन भइ अब, कीजे कोन उपाय।। १।। 🏵ओजत गागर ढारीये, यमुना जल के काज,।। यह मिस बाहिर निकसकें हम , जायें मिलें तजि लाज।।२।। 🌻आओ बछरा मेलियें, बनकों देहिं विडार।। वे दे हें, हम ही पठे हम, रहेंगी घरी द्वे चार।। ३।। 💥हा हारी हो,जातहों मोपें, नाहिन परत रह्यो।। तू तो सोचत हीं रही तें, मान्यों न मेरो कह्यो।। ४।। 💃राग रंग गहगड मच्यो, नंदराय दरबार।। गाय खेल हंस लिजिये, फाग बडो त्योहार।। ५।। 🌹तिनमें मोहन अति बने, नाचत सबे ग्वाल।। बाजे बहुविध बाजहि रंज, मुरूज डफ ताल।। ६।। ☘मुरली मुकुट बिराजही, कटिपट बाँधे पीत।। ... *इस पंक्ति को गाते गाते अकबर बादशाह* *की बेगम ताजबीबी को अत्यंत विरह हुआ* *और आपकी देह ने नित्य लीला प्राप्त की,* अंतिम पंक्ति श्री ठाकुरजी ने गायी *नृत्यत आवत ताज, के प्रभु गावत होरी गीत*🌹🌹🌹🌹 🌺सखियां एक दूसरे से बातें कर रही थी, होली खेलने के दिन शुरू हो गए है, जिसका सुंदर वर्णन गोपिजन करते है। कँही पर डफ बज रहा हैजो दर्शाता है कि प्रभु केहोली का खेल शुरू हो गया है। ताज अपने मन मे सोचती है कि में कोनसा बहाना करके खेल देखने जाउ।मेरी सास, नंदतो दुश्मन है मेरी वह नही जाने देंगी।अब प्रभु से मिलने का उपाय सोचती है 1 गोपी को याद आया कि घर मे पानी भरा हुआ है , अगर फैला दु तो सास मुझे ही भरने के लिए भेजेगी। तब ठाकुर जी के साथ होली खेल सकूँगी। यह नही तो दूसरा उपाय 2की वन में से गायो आने का समय हो गया है अगर में बछड़ो को खोल दु तो उन्हें पकड़ने के लिए मुझे भेज देंगी।इस बहाने प्रीतम के साथ दो,चार घड़ी साथ रह लुंगी। हा जो कोई मेरे साथ बरजोरी करेगा (जितने का प्रयन्त) तो मेरे से एक घड़ी भी नही रहा जायेगा।फिर तो ठाकुर जी से मिलने के लिए लोकलाज छोड़ कर गोपी घर से निकल पड़ी। नन्दालय मेबड़ी धूम धाम से होली चल रही थी।रंगों की फुआर उड़ रही थी।आनंद में मजाक हो रहे थे। इसलिए फ़ाग रंगों का बड़ा त्यौहार है। नंदालय में ठाकुर जी ग्वालवालो के साथ नाचने में मग्न है।अनेक प्रकार के वाद बज रहे है।रुज6, मुर्ज़, डफ-ताल बज रहे है। ठाकुर की मुरली मधुर स्वर में बज रही है। मस्तक पर मुकुट शोभ रहा है।,कमर पर पीताम्बर धरा हुआ है।गुसाँई जी की सेवक ताज बीबी को होली खेल के स अनुभव हो रहा है। 'मुरली मुकुट बिराजहि कटि पट बांधे पीट' इस धमार को गाते हुए ताज बीबी ने देह त्याग कर लीला में गयी।अंतिम पंक्ति ठाकुर जी ने खुद पूरी करि ''नृत्यत आवत ताज केप्रभु गावत होरी गीत""।

Comments (3)

Rama Devi Sahu
Feb 12, 2026
Holi Parv ke liye Bahut hi Sundar Panktiyan...👌👌 Jai Shree Radhe Krishna 🙏 Subha Ratri Jii 🙏🌹

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Feb 12, 2026
हरि बोल धन्यवाद 🙏

रामलालभट्ट
Feb 12, 2026
जय श्री हरिविष्णु।
