
Rama Devi Sahu
54 days ago
. “गुरु के वचन” वृन्दावन मे एक सन्त के पास कुछ शिष्य रहते थे, उनमें से एक शिष्य मन्द बुद्धि का था। एक बार गुरु देव ने सभी शिष्यों को अपने पास बुलाया और सब को एक मास के लिए ब्रज में अलग-अलग स्थान पर रहने की आज्ञा दी, और उस मन्द बुद्धि को बरसाने जाकर रहने को कहा। मन्द बुद्धि ने बाबा से पूछा बाबा मेरे रहने खाने की व्यवस्था वहाँ कौन करेगा। बाबा ने हंस कर कह दिया राधा रानी। कुछ दिनों बाद एक-एक करके सब बालक लौट आए, पर वो मन्द बुद्धि बालक नही आया बाबा को चिन्ता हुई के दो मास हो गए मन्द बुद्धि बालक नही आया जाकर देखना चाहिए। बाबा अपने शिष्य की सुध लेने बरसाने आ गए। बाबा ने देखा एक सुन्दर कुटिया के बाहर एक सुन्दर बालक बहुत सुन्दर भजन गायन कर रहा है। बाबा ने सोचा क्यों ना इन्हीं से पूछा जाए। बाबा जैसे ही उनके पास गए, वो उठ कर बाबा के चरणों में गिर गया और बोला आप आ गए गुरु देव! बाबा ने पूछा ये सब कैसे! तू ठीक कैसे हो गया ? शिष्य बोला बाबा आपके ही कहने से किशोरी जी ने मेरे रहने, खाने-पीने की व्यवस्था की और मुझे ठीक कर भजन करना भी सिखाया। बाबा अपने शिष्य पर बरसती किशोरी जी की कृपा को देख बहुत प्रसन्न हुए और मन-ही-मन सोचने मेरे शब्दों का मान रखते हुए मेरे शिष्य पर अपनी सारी कृपा उड़ेल दी किशोरीजी ने। इसलिए कहते है गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते। ० ० ० ॥जय जय श्री राधे॥ ************************
Comments (1)

सविता
Jul 7, 2026
RADHE RADHE 🙏🌹 JAI SHREE KRISHNA JI 🙏🌹 SHUBH PRABHAT VANDAN JI 🙏🌹
