MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

161 days ago

श्री राम जीव को घरों में भगवान नारायण स्वयं दर्शन देते हैं, जब वह अपने पूर्व जन्म कृत और उनमें किए गए पापों को तथा गर्भ की पीड़ा का अनुभव करता है तो वह बहुत दुखी होता है और तड़पकर नारायण नारायण ऐसा पुकारता है भगवान नारायण जीव पर दया करके और उसकी कारण पुकार सुनकर उसे गर्भ में दर्शन देते हैं जीव भगवान से प्रार्थना करता है कि इस बार उसे गर्भ से बाहर निकाल दीजिए, अब वह कभी पाप नहीं करेगा और सदा सर्वदा आपकी ही भक्ति में लीन रहकर इसी जन्म में मुक्ति प्राप्त करेगा। फिर जीव जब गर्भ से बाहर आता है, तो माया उसे गिरने लग जाती है किंतु फिर भी ईश्वर उसे पर एक बार फिर कृपा करते हैं और उसे तीन से 6 महीने तक अपने पूर्व जन्म के कर्मों का स्मरण करते हैं अच्छे कर्मों को देखकर वह छोटा सा बालक स्वत ही मुस्कुराता है और बुरे कर्मों को देखकर और उनके परिणामों से भयभीत होकर स्वत ही रोने लगता है। धीरे-धीरे जीव पूर्णतया माया के प्रभाव में आ जाता है और अपने प्रारब्ध को भूल जाता है इस प्रकार वह धीरे-धीरे पुनः ईश्वर को भूलकर संसार के कर्मों में लिप्त हो जाता है और पाप करने लगता है। किसी से जीव बार-बार अच्छी और बुरी योनियों में गति करता है

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!