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Rama Devi Sahu

297 days ago

*श्री विष्णु जी के निराकार स्वरूप का ध्यान* :- *शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं* *विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्*। *लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं* *वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्*।। *अर्थात जिनकी आकृति अतिशय शांत है, जो शेषनाग की शैया पर शयन किए हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो ‍देवताओं के भी ईश्वर और संपूर्ण जगत के आधार हैं, जो आकाश के सदृश सर्वत्र व्याप्त हैं, नीलमेघ के समान जिनका वर्ण है, अतिशय सुंदर जिनके संपूर्ण अंग हैं, जो योगियों द्वारा ध्यान करके प्राप्त किए जाते हैं, जो संपूर्ण लोकों के स्वामी हैं, जो जन्म-मरण रूप भय का नाश करने वाले हैं, ऐसे लक्ष्मीपति, कमलनेत्र भगवान श्रीविष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ*।. *मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं* । *यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्* ॥ *जिनकी कृपा से गूंगे बोलने लगते हैं, लंगड़े पहाड़ों को पार कर लेते हैं, उन परम आनंद स्वरुप श्रीमाधव की मैं वंदना करता हूँ॥ ॐ ॐ ॐ* *मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः*। *मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः*॥ *भागवान् विष्णु मंगल हैं, गरुड़ वाहन वाले मंगल हैं, कमल के समान नेत्र वाले मंगल हैं, हरि मंगल के भंडार हैं* । *सुविचार:*: *देवत्व* *सदगुण, सदाचार और सदप्रवृतियों का आपके जीवन में प्रवेश करना ही सौभाग्य वर्धक है क्योंकि मंगलकारी दैवत्व को आपने अपने अन्तःकरण में प्रवेश करने के लिये आह्वान किया था* l *महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप विशिष्ट बनें अपितु यह है कि आप शिष्ट बनें। यदि आप सदाचार युक्त, नीति युक्त, धर्ममय एवं निष्ठापूर्वक जीवन जीते हैं तो सत्य समझना आप दैवीय जीवन ही जीते हैं। देवता जहां रहते हैं वहीं स्वर्ग बन जाता है* l *आसुरी प्रवृतियों को धारण किया हुआ व्यक्ति अधर्मी होता है उसका अंत भी दुःखद ही होता है l सबको अपने जीवन में सदैव एक अच्छा इंसान बनने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। जहाँ एक अच्छे और सच्चे इंसान का निर्माण होता है, महान बनने की प्रक्रिया भी वहीं से प्रारम्भ होती है। जीवन में एक अच्छा इंसान बनना ही महान बनना भी है। मनुष्य योनि दुर्लभ है और इस योनि में जन्म मिलना बड़ी बात है l जीवन में देवत्व का जन्म होना, यह बहुत बड़ी और बात है। अच्छे संस्कार युक्त मानवता ही जीवन की श्रेष्ठता भी है*। *आपको सुविचारित करना ही मेरा ध्येय है* l

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