
Rama Devi Sahu
314 days ago
“ हे किशोरी जी ! मैं अपना सब दोष मानता हूँ।इन इन्द्रियों के छिन छिन जूते लात खाने पर भी इन्हीं का भरोसा करता हूँ एवं इनको बार-बार सांसारिक विषयों की सामग्री देता हूँ।कभी स्वप्न में भी इनके ऊपर क्रोध नहीं करता।यद्यपि यह जानता हूँ कि ब्रह्मलोक पर्यन्त के ऐश्वर्यों के विषय भोग देने पर भी तृप्ति नहीं हो सकती,फिर भी नहीं मानता एवं पापों का भंडार भरता रहता हूँ।अतएव हे घोष कुमारी राधिके ! तुम अपनी ओर देखकर ही मेरे उपर कृपा कर दो।” 🙏🌸🌿🌸🌿🌸🌿🌸🌿🌸🌿🌸🌿🙏

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