
Rama Devi Sahu
60 days ago
इस दोहे में भगवान श्रीगणेश की महिमा का वर्णन किया गया है। "कंठ विराजें शारदा" का भाव यह है कि स्वयं भगवान गणेश के कंठ में माँ शारदा विराजमान हैं, अर्थात उनकी वाणी ज्ञान, विद्या और दिव्य प्रज्ञा का स्रोत है। "कर में अंकुश साज" उनके हाथ में धारण किए गए अंकुश का संकेत है, जो मन, इन्द्रियों और जीवन को उचित मार्ग पर संचालित करने की शक्ति का प्रतीक है। दूसरी पंक्ति में बताया गया है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान श्रीगणेश की शरण ग्रहण करता है, उसके जीवन के विघ्न दूर होते हैं और भगवान स्वयं उसके कार्यों को सफल एवं मंगलमय बना देते हैं। यहाँ "संवरें उसके काज" का अर्थ है कि ईश्वर की कृपा से कार्य सिद्ध होने लगते हैं तथा जीवन की बाधाएँ दूर हो जाती हैं। इस प्रकार यह दोहा भगवान श्रीगणेश को ज्ञान, विवेक, अनुशासन और विघ्नों के नाशकर्ता के रूप में स्मरण करते हुए उनकी शरणागति का महत्व प्रतिपादित करता है।

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Jul 1, 2026
🙏‼️Ek Dantayh Vidmahe Vakratund Dhimahi Tanno Danti Prachodayat ‼️🙏 Subha Budhvaar Subah ki Ram Ram Ji 🌹🌹

सविता
Jul 1, 2026
"विघ्नहर्ता, सिद्धिदायक, प्रथम पूज्य श्री गणेश जी आपके जीवन से हर बाधा का अंत करें। गणपति बप्पा मोरया!"
