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Rama Devi Sahu

136 days ago

Ayurvedic ghee therapy घी - सिर्फ खाना नहीं, दो बूंद में पूरी जिंदगी अगर दुनिया की सारी औषधियों को रैंक दिया जाए , तो नंबर-1 पर अगर किसी एक दवा का नाम आएगा…तो वो होगा - घी। जी हां, आपके किचन में रखा वही साधारण सा घी। और इसकी सिर्फ दो बूंद - आपको ही नहीं, आपकी आने वाली पूरी generation को नई जिंदगी देने की ताकत रखती हैं। इसलिए बोला जाता है - घी – दो बूंद जिंदगी की। इस POST में तीन खास बातें समझेंगे: घी में ऐसा क्या है जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी दवा बनाता है? सिर्फ दो बूंद घी से कौन-कौन सी बीमारियां ठीक हो सकती हैं? बच्चों के लिए जमीन-जायदाद छोड़ने से ज्यादा फायदेमंद क्यों है घी छोड़ना? आयुर्वेद में घी = सर्वश्रेष्ठ दवा आयुर्वेद में घी को सुप्रीम मेडिसिन का दर्जा दिया गया है। खासकर गले के ऊपर की बीमारियों में। मतलब: सिर बाल आंख कान नाक दांत गला ब्रेन इन सब में घी नंबर-वन माना गया है। इसीलिए चरक ऋषि ने साफ लिखा है — उन्माद (मेंटल डिसऑर्डर) और अपस्मार (न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम) जैसी दिमाग की बीमारियों में घी सबसे श्रेष्ठ है। घी ठंडा है – और ज़हर का दुश्मन आयुर्वेद कहता है - घी का नेचर ठंडा होता है। और सबसे बड़ी बात - घी विषनाशक है। आजकल: केमिकल वाला खाना खेतों में यूरिया, DDT पॉल्यूशन कॉस्मेटिक्स (लिपस्टिक, डियोड्रेंट) हर जगह ज़हर भरा पड़ा है। इन सब toxins को बाहर निकालने की ताकत घी में होती है। घी और दिमाग – सुपर पावर कनेक्शन घी की एक यूनिक क्वालिटी है। ये तीनों चीजों पर एक साथ काम करता है: धी – समझने की शक्ति श्रुति – याद रखने की शक्ति स्मृति – सही वक्त पर याद आने की शक्ति ये तीनों प्रॉपर्टी एक साथ सिर्फ घी में मिलती है। इसीलिए बच्चे हों या बुजुर्ग — जिसे भी ब्रेन strong रखना है, उसे घी जरूर लेना चाहिए। ज्यादा गुस्सा? दिमाग में गर्मी? घी लगाओ जिन लोगों को: जल्दी गुस्सा आता है दिमाग हमेशा गरम रहता है जवानी में बाल झड़ रहे हैं बाल सफेद हो रहे हैं आंखों की परेशानी है इन सबके लिए घी बेस्ट है। क्योंकि घी शरीर और दिमाग दोनों को ठंडा करता है। गाय का घी क्यों खास है? वैसे सभी घी अच्छे होते हैं। पर आयुर्वेद में देसी गाय का घी सबसे ऊपर रखा गया है। इसे सात्विक कहा गया है। सात्विक मतलब - जो दिमाग में अच्छे विचार लाए और brain quality कई गुना बढ़ा दे। नाक में घी? हां बिल्कुल – यही असली तरीका है अगर आपके पास देसी गाय का घी है: 2–2 बूंद हल्का गुनगुना दाईं नाक में 2 बूंद बाईं नाक में 2 बूंद बस। अब सुनते ही लोग मुंह बनाते हैं — “… नाक में घी कौन डालता है?” पर फायदे सुनोगे तो खुद दिन में 10 बार डालोगे। नाक = दिमाग का दरवाजा आयुर्वेद कहता है: नासा ही शिरसो द्वार मतलब — नाक-दिमाग का दरवाजा है। जैसे घर में एंट्री दरवाजे से होती है, वैसे ही ब्रेन तक दवा पहुंचाने का रास्ता नाक है। इसी प्रक्रिया को पंचकर्म में कहते हैं — नस्य। Modern science भी यही बोलती है नाक और दिमाग के बीच एक खास bone होती है। वहीं से nerves direct brain तक जाती हैं। जब आप नाक में घी डालते हो - तो nourishment सीधा brain तक पहुंचता है। और brain का एक security gate होता है: Blood Brain Barrier (BBB) इस barrier को सबसे आसानी से पार करता है इसलिए घी ultimate है। कौन-कौन सी बीमारियां ठीक होती हैं? कॉलर बोन के ऊपर की हर बीमारी: सिर दर्द बाल झड़ना आंखों की कमजोरी कान की समस्या साइनस पिंपल्स गला थायराइड नींद ना आना स्ट्रेस टेंशन पैरालिसिस मेमोरी लॉस सब में नस्य (नाक में घी) बेस्ट है। बच्चे से बुजुर्ग तक – सबके लिए 5 साल से ऊपर कोई भी इसका यूज कर सकता है। जिन्हें: नींद नहीं आती ज्यादा टेंशन है ब्रेन वर्क ज्यादा है (स्टूडेंट, डॉक्टर, वकील, ऑफिस वाले) गुस्सा बहुत आता है सबके लिए रामबाण। बच्चे ज्यादा शरारती हों? रोज 2 बूंद — कुछ दिन में शांत। बुजुर्गों की याददाश्त कमजोर? घी लगाओ — धीरे धीरे सुधार। कितनी बार डालें? जब चाहो तब। नहीं तो कम से कम: सुबह दोपहर शाम रात 3–4 बार जरूर। शुरुआत में उंगली से भी लगा सकते हो। फिर बूंद डालना शुरू करो। घी जितना पुराना होता है — उतनी बड़ी दवा बनता है। आयुर्वेद में हजारों साल पुराने घी का वर्णन है। घी की कोई expiry नहीं। पुराना घी = ज्यादा ताकतवर घी। खासकर मानसिक रोगों में पुराना घी अमृत है। घी = सोने से भी ज्यादा कीमती चार्वाक ऋषि ने कहा था: यावत जीवेत, सुखम जीवेत, ऋणं कृत्वा घृतं पीवेत अब समझ आता है क्यों। क्योंकि घी गोल्ड से भी ज्यादा पावरफुल है। Final Line दो बूंद शुध्द घी - आपके लाखों रुपए बचाएंगी, घी को जिंदगी का हिस्सा बनाइए। स्वस्थ रहिए। पथरी पाईल्स लीवर पाचनतंत्र रोग के आयुर्वेदिक विशेषज्ञ

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Comments (1)

vijay kushwaha

vijay kushwaha

Apr 16, 2026

हर हर महादेव