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Rama Devi Sahu

336 days ago

🌞 बाहरी प्रकाश और आंतरिक प्रकाश 🌞 सूर्य देव अपने सात अश्वों के साथ सम्पूर्ण ब्रह्मांड को आलोकित करते हैं। हर घोड़ा एक छंद है, एक लय है, एक अनोखा रंग है। गायत्री का श्वेत तेज, बृहती की लाल अग्नि, उष्णिक का नीला आकाश, जगति की हरियाली, त्रिष्टुभ की पीली आभा, अनुष्टुभ का नारंगी तेज और पंक्ति का बैंगनी रहस्य— ये सब मिलकर जीवन का सम्पूर्ण संगीत रचते हैं। “सूर्य का यह बाहरी प्रकाश तभी अर्थपूर्ण है, जब भीतर का अंधकार भी प्रकाशमान हो। बाहर का सूरज तुम्हें केवल जीवन दे सकता है, लेकिन भीतर का सूरज ही तुम्हें जागृति देगा।” सूरज हमें रोज़ दिखाता है कि अंधकार चाहे कितना भी गाढ़ा क्यों न हो, प्रकाश उसे मिटा देता है। जीवन का वास्तविक सूर्य ध्यान के भीतर छिपा है। जब तुम भीतर का सूरज खोज लेते हो, तब बाहर का सूरज भी तुम्हें नया अर्थ देता है। हर रंग, हर छंद, हर घोड़ा हमारे भीतर की चेतना का प्रतीक है। बाहर का प्रकाश हमें जगाता है, भीतर का प्रकाश हमें मुक्त करता है। ध्यान वह सेतु है जो इन दोनों को जोड़ता है। 🌸 आमंत्रण: आओ, बाहर के सूर्य से प्रेरणा लेकर भीतर के सूर्य को खोजें। आचार्य रजनीश की ध्यान-साधना वही रथ है जो हमें उस परम सत्य तक ले जाएगी। बहुत गहरी और अद्भुत सोच है 🙏 आइए इसे मैं आपके लिए उन की विचारधारा के रंग में एक लंबी, विस्तृत और गहन टिप्पणी के रूप में पिरोता हूँ, ताकि यह पोस्टर या आर्टवर्क के साथ भी लगाया जा सके: 🌞 सूर्य का रथ और मनुष्य का मन 🌞 सूर्य देव सात घोड़ों पर आरूढ़ हैं। हर घोड़ा एक छंद है, एक रंग है, एक लय है— श्वेत, लाल, नीला, हरा, पीला, नारंगी और बैंगनी। ये सात रंग मिलकर सम्पूर्ण इंद्रधनुष रचते हैं। “जैसे बाहर के सूर्य को सात रंगों ने रथ दिया है, वैसे ही भीतर के मनुष्य को सात अवगुणों ने रथ में जकड़ रखा है।” 1. काम श्वेत घोड़े के समान है— क्योंकि पवित्रता के भ्रम में वह इच्छा को छुपाता है, और भीतर अग्नि बनकर जलाता है। 2. क्रोध लाल घोड़े के समान है— रक्त की तरह उग्र और विनाशकारी। 3. लोभ नीले घोड़े के समान है— गहराई का भ्रम देता है, लेकिन भीतर खालीपन छोड़ जाता है। 4. मोह हरे घोड़े के समान है— हरियाली की तरह आकर्षक, परंतु मनुष्य को बंधन में बाँध लेता है। 5. अहंकार पीले घोड़े के समान है— सोने की चमक की तरह जगमगाता है, पर अंततः भ्रम है। 6. मत्सर नारंगी घोड़े के समान है— आग की तरह जलता है, स्वयं को भी और दूसरों को भी। 7. द्वेष बैंगनी घोड़े के समान है— गहरा और रहस्यमय, पर भीतर जहर से भरा हुआ। “इन सातों घोड़ों पर अगर तुम बेहोश होकर बैठे हो, तो तुम्हारा जीवन सिर्फ संघर्ष और दुःख है। लेकिन अगर तुम जाग जाओ, अगर तुम ध्यान का रथी बन जाओ, तो यही सात रंग इंद्रधनुष बन जाते हैं, यही सात घोड़े तुम्हें सत्य की ओर ले जाते हैं।” काम को प्रेम में बदलो। क्रोध को करुणा में बदलो। लोभ को संतोष में बदलो। मोह को जागरूकता में बदलो। अहंकार को विनम्रता में बदलो। मत्सर को मैत्री में बदलो। द्वेष को करुणामयी शून्यता में बदलो। 🌸 जब ये सात अवगुण रूपांतरित हो जाते हैं, तब सूर्य का रथ तुम्हें अंधकार से नहीं, बल्कि मोक्ष की ज्योति की ओर ले जाता है। “बाहर का सूर्य तुम्हें जीवन देता है, भीतर का सूर्य तुम्हें मुक्ति देता है।” “सूर्य के सात घोड़े और मनुष्य के सात शत्रु — आपके अंदर बैठे परमात्मा को मेरा नमस्कार

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Comments (4)

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 28, 2025

🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 शुभ रविवार संध्या वंदन जी बहन जी ____🌞🌞 राधे राधे जय श्री कृष्ण जी!!!🌞🌞🔹 आपका आने वाला हर एक पल खुशियों से भरा रहे🔹🌞🔹 इसी मनोकामना के साथ!! सितंबर महीने के अंतिम रविवार शुभ संध्या की हार्दिक शुभकामनाएं जी//🌞🌞🌞🙏

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 28, 2025

🌞🌞💥ॐ सूर्याय नमः💥💥💥💥💥💥💥💥ॐ आदित्य नमः💥💥💥💥💥💥💥💥ॐभास्कर आए नमः💥💥💥 सूर्य देव भगवान किया पर कृपा दृष्टि सदैव आप और आपके परिवार पर बनी रहे।। आपका हर एक पल सुखद मंगलमय हो।धन्यवाद् ||||||•जी बहन जी•|||||| सभी पोस्ट बहुत ही अच्छे हैं।।🌞🌞

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 28, 2025

🙏🙏🙏🙏🙏

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

Sep 28, 2025

ॐ श्री सूर्य देवाय नमो नमः 🙏🙏 जगत प्रकशित करने वाले आरोग्य सूर्य देव आशीर्वाद कृपा से सपरिवार को दीर्घायु यश वैभव सुख शांति समृद्धि प्रदान हो औरआप सभी के उज्जवल भविष्य की शुभ कामनाएं करते हैं 🙏🙏