
Rama Devi Sahu
133 days ago
परशुराम जन्मोत्सव का पर्व भगवान विष्णु के छठे स्वरूप के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। हर वर्ष परशुराम जन्मोत्सव का पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था इसीलिए प्रदोष काल में जब तृतीया तिथि प्रारंभ होती है तब इसे परशुराम जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान परशुराम जगत के पालनहार विष्णुजी के छठे अवतार हैं। भगवान परशुराम सात चिरंजीवियों अश्वत्थामा, राजा बलि, परशुराम, विभीषण, महर्षि व्यास, हनुमान, कृपाचार्य इनमें से एक हैं। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के परम भक्त परशुराम जी न्याय के देवता हैं, जिन्होंने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन किया था। तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह करीब 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। ऐसे में परशुराम जयंती 19 अप्रैल को ही मनाई जाएगी, क्योंकि प्रदोष काल उसी दिन पड़ रहा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान परशुराम की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। कठिन कामों को पूरा करने की ताकत मिलती है और मन को शांति मिलती है। इस दिन पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। भगवान परशुराम के जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏

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