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Tarlok singh

133 days ago

*न चादर बड़ी* कीजिये, *न ख्वाहिशें दफन* कीजिये, *चार दिन* की *ज़िन्दगी है,* बस *चैन से बसर* कीजिये। *न परेशान* किसी को कीजिये, *न हैरान* किसी को *कीजिये,* कोई *लाख गलत* भी *बोले,* बस *मुस्कुरा कर छोड़* दीजिये। *न रूठा* किसी से कीजिये, *न झूठा वादा* किसी से *कीजिये,* कुछ *फुरसत के पल* निकालिये, कभी *खुद से भी मिला कीजिये।*

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