
Rohit Patel
337 days ago
ॐ शिवगोरक्ष योगी आदेश🚩 ।। पगलु वाणी ।। २७-९-२०२५ इष्ट और गुरुतत्व दोनो साधक और शिष्य के हृदय में रहते है, इन्हें बहार ढूढने का प्रयास व्यर्थ ही है । गुरु का शरीर और इष्ट की मूर्ति मात्र सांसारिक रूप है, जिन्हें आंखों से देखा जाता है, हांथो से स्पर्श की अनुभूति ली जाती है । परन्तु सत्य यही है कि गुरु और इष्ट वो परम शक्तिया है जो प्राणवायु के समान सदैव अपने शिष्य साधक के आस पास और भीतर रहती है । कई उदाहरण है सनातन संस्कृति में जब भी शिष्य ने अपने गुरु को याद किया हज़ारो किलोमीटर दूर होने के बाद भी शिष्य को गुरु की अनुभूति और दर्शन हुए, और सच्चे भक्त की करुण पुकार पर इष्ट दौड़े चले आये । इसलिए गुरु-सत्ता और इष्ट-शक्ति को हृदय में आत्मसात करे, इनसे आत्मा का एकाकार ही मुक्ति का माध्यम बन जाता है ।। तू मुझमे है और मैं तुझमे हूँ, नही कोई भी अब हमसे पराया । दो दीप की एक ज्योति है पगलु, ब्रह्म ने भी अज़ब खेल बनाया ।। शिवगोरक्ष कल्याण करे । शिवशक्ति भक्ति, शक्ति, मुक्ति, सद्बुध्दि दे । भैरव उस्ताद सदा सहाय । आदेश🚩 आदेश 🚩
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