
Subodhanand swami Saraswati
379 days ago
हमारे कर्म ही हमारे शत्रु। हमारे द्वारा किए हुए कर्म ही हमारे मित्र। इसमे किसी और का भागीदारी नही हे। सुख आए तो भी ठिक दुख आए तो भी ठिक, है ईश्वर जैसा आपकी मर्जी तुजैसा रखे कोइ शिकायत नही आपका दिआ हुआ प्रसाद समझ कर ग्रहण करेंगे। ॐॐॐ हरिॐशान्ति।
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