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Rama Devi Sahu

15 days ago

*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 15 अगस्त 2026* *⛅दिन - शनिवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - वर्षा* *⛅मास - श्रावण* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - तृतीया शाम 05:28 तक तत्पश्चात् चतुर्थी* *⛅नक्षत्र -‌ उत्तराफाल्गुनी 16 अगस्त प्रातः 03:25 तक तत्पश्चात् हस्त* *⛅योग - शिव सुबह 07:09 तक, तत्पश्चात् सिद्ध 16 अगस्त प्रातः 05:21 तक, तत्पश्चात् साध्य* *⛅राहुकाल - सुबह 09:17 से सुबह 10:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:03* *⛅सूर्यास्त - 06:59 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:35 से प्रातः 05:19 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:05 से दोपहर 12:57 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:09 से मध्यरात्रि 12:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - हरियाली तीज, स्वतंत्रता दिवस* *🌥️विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *🕉️ ब्रह्मप्रतिपादन 1 📜* *🔴 बाल्मीकिजी बोले कि जब इस प्रकार कुन्ददन्त ने कहा तब वशिष्ठजी ने कहा तब वशिष्ठजी सुनकर परम उचित वचन🗣️ परमपदपावन का कारण फिर कहने लगे* *🔴 कि हे रामजी🙏! अब कुन्ददन्त ने आत्मअनुभव में विश्राम🧘‍♂️ पाया है इसको अब हस्तामलकवत् अपना आप अनुभवरूप जगत्🌍 भासता है आत्मा✨ ही दृश्यरूप होकर भासता है और आत्मा ही दृष्टारूप है दूसरी वस्तु कुछ नहीं | अपना अनुभव👁️ ही जगत्रूप हो भासता है सो अनुभव आकाश☁️ सम शान्तरूप🕊️, अनन्त और अखण्ड सदा ज्यों का त्यों है |* *🔴 हे साधो! वह नानारूप भासता है परन्तु अनाना है और सदा ज्यों का त्यों अचेत चिन्मात्र परमशून्य🌌 है जिससे शून्य हो जाता है और चेत दृश्यरूप फुरने से रहित है इसी कारण परमशून्य है, बोलता दृष्टि आता है परन्तु परम मौन🤐 है |* *🔴 हे रामजी उसमे जगत् कुछ बना नहीं, जैसे स्वप्ने💭 में पहाड़⛰️ दृष्टि आते हैं सो न सत्य⚖️ हैं और न असत्य❌ है, तैसे ही यह जगत् सत्य असत्य से विलक्षण हैं, क्योंकि कुछ बना नहीं-जो कुछ भासता है सो आत्मा है जैसे रत्नों💎 का प्रकाश🌟 चमत्कार होता है, तैसे ही आत्मा का प्रकाश जगत् है और जैसे समुद्र🌊 द्रवता से तरंगरूप〰️ हो भासता है, तैसे ही ब्रह्म🕉️ संवेदन से जगत्रूप हो भासता हे |* *🔴 आदि स्पन्द फुर आई है सो जगत्रूप होकर स्थित है और वह जैसे हुआ है तैसे हुआ है पर आत्मा कार्य⚙️ कारणभाव से रहित है | जिसको प्रमाद🌀 है उसको यह कार्य-कारणभाव सहित भासता है उसको तैसा ही है पर जो सत्य जानकर पाप🔥 करते हैं उनके बड़े पाप उदय🌅 होते हैं और स्थावररूप होकर फिर जंगम मनुष्य👤 होते हैं |* *🔴 हे रामजी! इस प्रकार यह ज्ञानसंवित्🧠 चैतसम्बन्धी होकर नाना प्रकार के रूप धारती है और प्रमाद से भिन्न-भिन्न भासती है परन्तु स्वरूप से कुछ और नहीं होती सदा अखण्डरूप है | जबतक प्रमाद होता है तबतक जगत् का आदि और अन्त नहीं भासता और जब प्रमाद से जागता है तब सर्वकल्पना💭 मिट जाती हैं |* *🔴 हे रामजी! यह सर्व जगत् जो भासता है सो कुछ बना नहीं वही ब्रह्मसत्ता अपने आप में स्थित है | जब जाग्रत् अवस्था का अभाव होता है और सुषुप्ति💤 आती है तो उसमें न शुभ😇 की कल्पना रहती है और न अशुभ की कल्पना रहती है, उदय-अस्त की कल्पना से रहित केवल अद्वैतसत्ता रहती है और जब फिर उसमें चैतन्यता✨ फुरती है तब फिर स्वप्ने की सृष्टि🌱 भासती है |* *🔴 कहीं स्थावर जंगम सृष्टि भासती है जिसमें संवेदन फुरती भासती है सो जंगम कहाता है और जिसमें संवेदन फुरना नहीं भासता सो स्थावर कहाता है परन्तु और कुछ नहीं वही अद्वैत अनुभवसत्ता स्थावर जंगमरूप हो भासती है, तैसे ही आत्मा अनुभव यह जगत् हो भासता है |* *🔴 हे रामजी! सृष्टि के आदि परम सुषुप्तिसत्ता थी उसमें संवेदन फुरने से जगत् भासि आया सो वही संवेदनरूप जगत् है और आत्मसत्ता में फुरी है वही रूप है भिन्न कुछ नहीं | जैसे शरीर💪 के अंग हाथ✋, पाँव👣, नख केशादिक सब शरीररूप हैं तैसे ही परमात्मा के अंग हस्त पादादिक है रोम सृष्टि और नख केशादिक स्थावर सृष्टि सब आत्म रूप है और दूसरी वस्तु कुछ नहीं बनी |* *🔴 जैसे स्वप्ने की सृष्टि अनुभवरूप होती है और संकल्पपुर की रची सृष्टि संकल्परूप होती है, तैसे ही यह सृष्टि अनुभवरूप है और किसी कारण से नहीं उपजी-इससे ब्रह्म ही रूप है | ब्रह्म के सूक्ष्म अणु⚛️ में सृष्टि फुरी है सो क्या रूप है |

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Comments (3)

Shah  🩷

Shah 🩷

Aug 15, 2026

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹

बरखा शर्मा

बरखा शर्मा

Aug 15, 2026

🇮🇳🇮🇳स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🇮🇳🇮🇳🫡

प्रेम कुमार

प्रेम कुमार

Aug 15, 2026

🌹🌹 ऊं शनैश्चराय नमः 🌹 शुभ प्रभात वंदन बहना 🌹 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🌹