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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ हिंदी अर्थ: हे मनुष्य! तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने तक ही है, उसके फल पर कभी नहीं। इसलिए तुम कभी कर्म के फल की इच्छा मत करो और न ही कर्म करने में तुम्हारी कोई आसक्ति (अरुचि) हो。

Comments (2)

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Jun 24, 2026

ईश्वर आपको आशीर्वाद दें,🙏 धन्यवाद।

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 24, 2026

🙏🔱!!जय ब्रह्मा!!विष्णु!!महेश!!🔱🙏 एक हाथ में कमल है, दूजे सर्प विराजे। बीच में नारायण खड़े, छवि अति सुंदर साजे॥ अर्थ: इस दिव्य स्वरूप में एक तरफ भगवान ब्रह्मा के हाथ में पवित्र "कमल" का फूल है, तो दूसरी तरफ भगवान शिव के गले और स्वरूप में "सर्प" (सांप) विराजमान है। इन दोनों के ठीक मध्य (बीच) में जगत के पालनहार भगवान "नारायण" (विष्णु जी) खड़े हैं। तीनों देवों की यह संयुक्त छवि अत्यंत सुंदर, अलौकिक और मनमोहक लग रही है। कमल और ब्रह्मा जी: ब्रह्मा जी के हाथ में खिला हुआ कमल ज्ञान, पवित्रता और ब्रह्मांड के सृजन (रचना) का प्रतीक है। सर्प और शिव जी: शिव जी के साथ दिखने वाला नाग काल (समय), मृत्यु और संहार (पुनर्निर्माण) की शक्ति को दर्शाता है। वे विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहने का संदेश देते हैं। नारायण (विष्णु जी): मध्य में स्थित भगवान विष्णु नीले रंग के दिव्य स्वरूप में हैं। वे संतुलन के प्रतीक हैं, जो सृजन और संहार के बीच पूरी सृष्टि का पालन-पोषण करते हैं। इस दोहे का मुख्य संदेशएकता का संदेश: यह दोहा हमें सिखाता है कि शक्तियां भले ही अलग-अलग दिखें (रचना, पालन और संहार), लेकिन वे सब अंततः एक ही परमेश्वर का हिस्सा हैं। ईश्वर में कोई भेद नहीं है। जीवन में संतुलन: कमल सुंदरता का प्रतीक है और सर्प भय का। जीवन में सुख (कमल) और कठिनाइयाँ (सर्प) दोनों साथ चलते हैं। हमें नारायण की तरह शांत रहकर जीवन के सफर में संतुलन बनाए रखना चाहिए। 🙏🔱!!जय ब्रह्मा!!विष्णु!!महेश!!🔱🙏